22 साल पहले मामूली विवाद में भाई ने सगे भाई की अपने दो बेटों के साथ इतनी बेरहमी से पिटाई कर दी कि इलाज के दौरान बड़े भाई की मौत हो गई। मामले को लेकर मृतक के बेटे ने प्राथमिकी दर्ज कराई और मामला 22 साल तक कोर्ट में चला। मामले में सगे भाई की हत्या करने वाले को अदालत इस वजह से सजा नही सुना सकी क्योकि हत्यारे भाई के साथ उपर वाले ने इंसाफ किया और उसकी मामले के ट्रायल के दौरान मौत हो गई। वही मामले में बिहार की एक अदालत ने चाचा की हत्या करने वाले दोनों सगे भतीजों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
यह है मामला
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि मदनपुर थाना के करमडीह गांव में सार्वजनिक कुआं तक आने-जाने के लिए गैर मजरूआ जमीन से रास्ता बनाने को लेकर के लिए गांव के ही महंग राम और उनके पुत्र सूचक और उनके पुत्र संजय राम का सहंग राम से विवाद हुआ था। इसी विवाद में सहंग राम के दो लड़कों कृष्णा राम और कृत राम ने दोनों की बेरहमी से पिटाई की। पिटाई से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान महंग राम की अस्पताल में मौत हो गई थी। मामले को लेकर करमडीह निवासी संजय राम ने 26 जून 2003 को मदनपुर थाना में प्राथमिकी संख्या-67/2003 दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में कहा था कि उनके पिता महंग राम गांव के सार्वजनिक कुएं तक गैर मजरूआ जमीन से होकर जाने के लिए सुगम रास्ता बना रहे थे। इस दौरान उसके चाचा सहंग राम ने रोका और अपने दोनों बेटों संग मिलकर पीटने लगे। बचाव करने पर तीनों ने मिलकर उसे भी पीटा और पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल पिता की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई जबकि वह जीवित बच गए। इसी मामले की गुरूवार को हुई अंतिम सुनवाई में कोर्ट ने दोनों भतीजों को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि मामले के ट्रायल के दौरान ही सूचक के सगे चाचा की मौत हो जाने के कारण कोर्ट द्वारा तकनीकी कारणों से सजा नही सुनाई जा सकी।
मामले की अंतिम सुनवाई में कोर्ट ने सुनाई सजा
इसी मामले में औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला जज राजकुमार की अदालत ने गुरूवार को अंतिम सुनवाई की और फैसला सुनाया। कोर्ट ने मदनपुर थाना कांड संख्या-67/03, जीआर-1139/03 एवं एसटीआर-306/03 में सज़ा के बिंदु पर अंतिम सुनवाई की। इसके बाद कोर्ट ने दोनों भतीजों- मदनपुर थाना के करमडीह निवासी कृष्णा राम और कृत राम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हत्यारे भतीजों को उम्रकैद की सजा व 10 हजार का जुर्माना
लोक अभियोजक पुष्कर अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट ने अभियुक्तों को भादंवि धारा-302/34 में आजीवन कारावास की सजा, दस हजार का जुर्माना और जूर्माना न देने पर एक साल के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। मामले में अभियोजन की ओर डॉक्टर, आईओ सहित ग्रामीणो की गवाही हुई थी। मामले में 25 दिसंबर 2003 को अभियुक्तों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/34 के तहत कोर्ट ने आरोप गठित किया था और 10 जुलाई 2025 को भादंवि की धारा-302/34 में दोनों को दोषी करार दिया था।
बचाव पक्ष ने घर का कमाउं सदस्य होने की दलील से की सजा में कमी की मांग
मामले में सज़ा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि अभियुक्त घर का कमाऊ सदस्य हैं। उनकी मां लकवाग्रस्त है। दोनों सहोदर भाई है। दोनों मजदूरी करते हैं। वही इन दलीलों को खारिज करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि अपराध की गंभीरता देखते हुए सख्त सज़ा दी जाए। मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायधीश ने सज़ा सुनाई। इसके बाद अभियुक्तों को अपनी करनी पर पछतावा महसूस होने लगा।