बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) संगठन में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जदयू के प्रदेश सचिव डॉ. चंदन कुमार यादव ने लगातार कार्यकर्ताओं के साथ उपेक्षा और सम्मान न मिलने से आहत होकर प्रदेश नेतृत्व से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम से जिला जदयू संगठन में चर्चा का विषय बन गया है।
डॉ. चंदन कुमार यादव ने अपने इस्तीफे के पत्र में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को सूचित किया कि वे पद एवं पार्टी की प्रथिमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से और मीडिया के माध्यम से बार-बार यह जानकारी दी कि किस प्रकार कुछ स्वयंभू नेता अपने लोगों को संगठन और सरकार में स्थापित करवा रहे हैं, जिससे पार्टी के साथ वर्षों से जुड़े नीतीशवादी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।
डॉ. चंदन ने कहा कि उन्होंने अपने छात्र जीवन से विगत 20-22 वर्षों तक अपने नेता नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड को मजबूत करने के लिए अपने जीवन और माल की परवाह किए बिना कार्य किया। उन्होंने बताया कि जब पूरे बिहार में राजद के बाहुबली नेताओं के भय से जिला संगठन में कार्यकर्ता प्रचार-प्रसार करने में भयभीत थे, उस समय भी उन्होंने अपने जान की परवाह किए बिना पार्टी को मजबूती प्रदान की।
उन्होंने नए साथियों का स्वागत करने के साथ-साथ पुराने और समर्पित नीतीशवादी कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लिए प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हर संभव प्रयास किया, लेकिन इसका कोई असर नहीं हो सका। डॉ. चंदन ने आरोप लगाया कि पार्टी मुख्यालय में बैठे मठाधीशों की परिक्रमा के बिना संगठनात्मक और सरकारी दायित्व निभाना असंभव हो गया है और अब नीतीशवादी कार्यकर्ताओं को संगठन और सरकार में स्थान नहीं मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि पार्टी में अब लोकतंत्र नहीं बचा है और वही कार्यकर्ता संगठन में महत्व प्राप्त करेंगे जो स्वयंभू नेताओं की परिक्रमा करेंगे या उनकी विचारधारा के होंगे। डॉ. चंदन ने यह भी स्पष्ट किया कि नीतीशवादी विचारधारा के समर्पित कार्यकर्ताओं की पार्टी में अब कोई आवश्यकता या उपयोगिता नहीं रही।
डॉ. चंदन कुमार ने लिखा कि वह हमेशा बिहार के आम नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के हित में और नीतीश कुमार के शुभचिंतक के रूप में कार्य करते आए हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में उनके साथ-साथ लाखों समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं को यह महसूस कराया जा रहा है कि उनका पार्टी में कोई महत्व नहीं है। अंत में डॉ. चंदन ने कहा कि जब उनकी उपयोगिता पार्टी को नहीं रही, तो अपने नेता के हाथ को मजबूत करने की दिशा में उनका अधिकतम समर्पण अब त्यागपत्र देने में है। उन्होंने अपना इस्तीफा जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को भेजा है।
'22 वर्षों से पार्टी को सिंचा, दिल को मजबूत कर इस्तीफा दिया'
जदयू के प्रदेश सचिव डॉ चंदन कुमार यादव पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने कहा 22 वर्षों से पार्टी को सिंचा है। दिल को मजबूत कर इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि यह पहला इस्तीफा नहीं है। कुछ दिनों के बाद पटना में भी कई जदयू नेता इस्तीफा देंगे। उन्होंने कोई राजनीतिक पार्टी में जाने की बात नहीं कही, लेकिन समाज सेवा से जुड़े रहेंगे।