बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए 11 और 12 जुलाई को गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) में आयोजित होने वाले दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम को लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम विधायकों को संसदीय कार्यों में दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि लगातार हो रहे राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय आयोजनों के कारण अब गया को पटना के बाद बिहार की दूसरी प्रशासनिक राजधानी कहा जा सकता है। पढ़िए उन्होंने इस बातचीत में और क्या बातें कही।
सवाल: गयाजी में पहली बार विधानसभा सदस्यों का प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित करने के पीछे क्या उद्देश्य है?
जवाब: बिहार विधानसभा में पहली बार चुने गए विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं, नियमों और विधायी कार्यों की बेहतर जानकारी देने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि विधायक सदन के भीतर प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकें और अपने क्षेत्र के विकास के लिए अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। इस कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री और सभी नवनिर्वाचित विधायक शामिल होंगे।
सवाल: लोकसभा की संस्था PRIDE के इस प्रशिक्षण में क्या भूमिका होगी?
जवाब: पीआरआईडी देशभर की विधानसभाओं में समय-समय पर जनप्रतिनिधियों को संसदीय कार्यों का प्रशिक्षण देती है। इसके विशेषज्ञ विधायकों को सदन की कार्यप्रणाली, नियमों और संसदीय परंपराओं की जानकारी देंगे, ताकि वे विधानसभा में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
सवाल: उपराष्ट्रपति के शामिल होने से बिहार विधानसभा को क्या संदेश मिलेगा?
जवाब: भारत के उपराष्ट्रपति का सार्वजनिक जीवन और संसदीय राजनीति का लंबा अनुभव रहा है। उनका मार्गदर्शन बिहार के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए बेहद उपयोगी होगा। यह बिहार के लिए गौरव की बात है कि वे गया आ रहे हैं और अपने अनुभव साझा करेंगे।
सवाल: इस प्रशिक्षण से विधायकों को क्या व्यावहारिक लाभ मिलेगा?
जवाब: दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद विधायक अपनी जिम्मेदारियों, अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में प्रभावी तरीके से उठा सकेंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप जनप्रतिनिधि की भूमिका निभा सकेंगे।
सवाल: बिहार विधानसभा को तकनीक से जोड़ने की आगे क्या योजना है?
जवाब: हमने विधानसभा में कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया है। जीरो आवर भी ऑनलाइन हो चुका है। आने वाले समय में डिजिटल इंडिया के विजन के अनुरूप विधानसभा की कार्यवाही को और अधिक तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
सवाल: गयाजी में लगातार बड़े सरकारी आयोजन हो रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं?
जवाब: हाल ही में न्यायपालिका से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों का दो दिवसीय कार्यक्रम भी बिपार्ड में हुआ था। यहां समय-समय पर प्रशासनिक, न्यायिक और अन्य सरकारी संस्थाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होते हैं। गया केवल मोक्ष और ज्ञान की भूमि ही नहीं, बल्कि अब प्रशासनिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गया के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर, बोधगया कॉरिडोर, विश्वस्तरीय रेलवे जंक्शन, रैपिड ट्रेन और सैटेलाइट टाउनशिप जैसी परियोजनाएं शहर की तस्वीर बदलेंगी। आने वाले वर्षों में गया एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित होगा।
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सवाल: क्या पटना के बाद गया को बिहार की दूसरी राजधानी कहा जा सकता है?
जवाब: बिल्कुल, गया आज आध्यात्मिक, धार्मिक और पर्यटन की वैश्विक पहचान रखने वाला शहर है। देश-विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं। 2019 में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक भी गया में हुई थी। अब पहली बार बिहार विधानसभा का प्रबोधन कार्यक्रम भी यहीं आयोजित हो रहा है। लगातार बढ़ती सरकारी गतिविधियां और विकास परियोजनाएं यह संकेत देती हैं कि गया प्रशासनिक दृष्टि से भी नई पहचान बना रहा है। आने वाले समय में गया विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।