सामान्य से दोगुना बारिश और बाढ़ ने जिले में खेती का गणित बिगाड़ दिया है। इसे लेकर अब जिला प्रशासन अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना की तैयारी में जुटा है। खेती का गणित बिगड़ने का मामला सोमवार को औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा की अध्यक्षता में अत्यधिक वर्षा एवं जलजमाव की स्थिति की समीक्षा को लेकर हुई बैठक में सामने आया।
सितंबर में सामान्य से 196.97% अधिक वर्षापात
बैठक में डीएम ने जिले के विभिन्न अंचलों में जलजमाव की वर्तमान स्थिति, जल निकासी, कृषि क्षेत्र पर प्रभाव, सड़क एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं की स्थिति तथा राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि 7 सितंबर तक जिले में कुल 835.5 मिमी वर्षापात दर्ज किया गया है, जबकि सामान्य वर्षापात 873.7 मिमी है।
विशेष रूप से सितंबर माह में 7 सितंबर तक सामान्य 49.5 मिमी के विरुद्ध 147.0 मिमी वर्षापात दर्ज किया गया है, जो सामान्य से 196.97 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान डीएम ने सोन नदी के जलस्तर की भी समीक्षा की। पाया गया कि 7 सितंबर को सुबह 7 बजे सोन नदी का जलस्तर 339.50 फीट तथा जल डिस्चार्ज 1,48,943 क्यूसेक दर्ज किया गया। वर्तमान में 41 गेट खुले होने की जानकारी दी गई।
जलजमाव के कारण तलाशेंगे अधिकारी
जिलाधिकारी ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जलजमाव उत्पन्न होने के वास्तविक कारणों का विश्लेषण करें। साथ ही तत्काल किए जाने वाले उपायों के लिए शॉर्ट टर्म प्लान तथा भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान तैयार करें। जिन व्यक्तियों अथवा संबंधित पक्षों की लापरवाही या अन्य कारणों से जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हुई है, उन्हें शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
4,019.50 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि अत्यधिक वर्षा एवं जलजमाव के कारण जिले में कुल 4,019.50 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। जल निकासी के बाद पुनः फसल क्षेत्र का रिव्यू और सर्वे कराया जाएगा, ताकि वास्तविक फसल क्षति का आकलन किया जा सके।
प्रभावित परिवारों को राहत
अत्यधिक वर्षा से प्रभावित परिवारों को तात्कालिक राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न प्रखंडों में कुल 212 पॉलीथिन शीट वितरित की गई हैं। इनमें गोह में 125, मदनपुर में 39, हसपुरा में 20, देव में 15, बारुण में 6, ओबरा में 4, कुटुंबा में 2 तथा रफीगंज में 1 पॉलीथिन शीट वितरित की गई है।
नए पुल का प्रस्ताव स्वीकृत
सड़क एवं आधारभूत संरचनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। पथ निर्माण विभाग के तहत देव के बेलसारा गांव, रफीगंज के बहादुरपुर बरसाती नाला, ओबरा के ओबरा-चपरी और रफीगंज के माड़ीपुर धावा नदी समेत विभिन्न स्थलों को प्रभावित बताया गया। डीएम ने ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता को रफीगंज के मिश्रबीघा गांव में सड़क निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। वहीं, आरसीडी के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि रफीगंज के बहादुरपुर बरसाती नाला से संबंधित पुल के टॉप स्लैब की कास्टिंग का कार्य लगभग 15 दिनों बाद शुरू किया जाएगा। माड़ीपुर स्थित धावा नदी पर नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है।
जलजमाव वाले इलाकों में बिजली और स्वास्थ्य पर खास निगरानी
जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग के पदाधिकारियों को जलजमाव वाले क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था का विशेष निरीक्षण करने का निर्देश दिया। कहीं भी बिजली के तार ढीले न हों तथा जलजमाव वाले क्षेत्रों में खराब अथवा जोखिम वाले ट्रांसफॉर्मर और विद्युत उपकरणों को आवश्यकतानुसार आइसोलेट कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वहीं, जलजमाव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग को हेल्थ कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
बैठक में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, अपर समाहर्ता आपदा उपेंद्र पंडित, सिविल सर्जन, अनुमंडल पदाधिकारी सदर गौरव सिंघ, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शी, जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज, संबंधित अंचल अधिकारी एवं सभी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी शामिल रहे।