बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। 2020 के चुनाव में औरंगाबाद जिले की सभी छह सीटों पर रणनीतिक जीत दिलाने वाले राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक सुरेश मेहता ने पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने बुधवार को समर्थकों के साथ एनडीए समर्थित भाजपा प्रत्याशी त्रिविक्रम नारायण सिंह के पिता व पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल नारायण सिंह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
ये भी पढ़ें: बाल सुधार गृह में फिर बड़ा कांड; सुरक्षाकर्मी पर हमला कर 12 बच्चे भागे, 5 को फिर पकड़ा गया
उन्होंने दावा किया, “अब मैं भाजपा में हूं और सिर्फ औरंगाबाद ही नहीं, जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर एनडीए को जीत दिलाने का काम करूंगा। यह केवल दावा नहीं, बल्कि धरातल की सच्चाई है। जैसे 2020 में मेरे नेतृत्व में महागठबंधन को छह सीटों पर जीत मिली थी, इस बार वही जीत एनडीए को मिलेगी।”
“कौरवों को छोड़ ‘पांडव’ खेमें में आए सुरेश मेहता”
पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल नारायण सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा, “यह चुनाव एक चुनावी महाभारत है। जैसे धर्मयुद्ध में कौरव और पांडव दोनों को पक्ष चुनने की स्वतंत्रता थी, वैसे ही इस बार भी है। हमें खुशी है कि इस धर्मयुद्ध में सुरेश मेहता ‘पांडव’ खेमें में आ गए हैं। भाजपा में उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। उनके आने से औरंगाबाद में एनडीए और मजबूत हुआ है। एनडीए गठबंधन पूरी ताकत से औरंगाबाद की सभी छह सीटें जीतेगा और राज्य में फिर से एनडीए की सरकार बनेगी।”
“औरंगाबाद में निर्णायक साबित हो सकता है मेहता फैक्टर”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरेश मेहता का औरंगाबाद क्षेत्र में कुशवाहा समुदाय के साथ-साथ पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों में भी खासा प्रभाव है। उन्हें राजद सांसद अभय कुशवाहा के प्रभाव का जवाब माना जा रहा है। भाजपा ने मेहता को शामिल कर अभय कुशवाहा के प्रभाव को कमजोर करने का रणनीतिक कदम उठाया है।