हिंदू धर्म में पितरों के मोक्ष के लिए तर्पण और पिंडदान काफी अहम माना जाता है। ऐसे में सनातन धर्म में बिहार के गया का महत्व काफी ज्यादा है। इसके चलते रोजाना करीब तीन-चार हजार लोग पिंडदान के लिए गया पहुंचते हैं। वहीं, पितृपक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए गया जाने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। दरअसल, 31 दिसंबर से गया में पितृ पक्ष मेला शुरू हो रहा है, जो 14 जनवरी तक चलेगा।
हर साल दो बार लगता है मेला
बता दें कि गया में हर साल दो बार पितृ पक्ष मेला आयोजित किया जाता है। पहला मेला आश्विन महीने में होता है, जबकि दूसरा मेला पौष महीने में होता है। इस बार पौष माह की शुरुआत 31 दिसंबर से हो रही है।
15 दिन चलेगा मेला
ज्योतिष शास्त्र के जानकार बताते हैं कि इस साल मिनी पितृ पक्ष 31 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जो 14 जनवरी मकर संक्रांति तक चलेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान हजारों लोग गया पहुंचते हैं। इनमें मकर सक्रांति पर स्नान के लिए गंगासागर जाने वाले तीर्थयात्री काफी ज्यादा होते हैं।
प्रशासन नहीं करता तैयारी
गौरतलब है कि मिनी पितृपक्ष के लिए जिला प्रशासन कोई भी तैयारी नहीं करता है। इस दौरान नगर निगम सिर्फ पिंड वेदियों की सफाई करा देता है। बता दें कि गया शहर में देवघाट, प्रेतशिला, राम शिला, अझयवट और सीता कुंड सहित कई पिंडवेदी हैं। ऐसे में तीर्थ यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।