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IIT में प्रवेश के लिए नहीं थे पैसे, दो घंटे में मिली पांच लाख की मदद

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आईआईटी का एंट्रेस पास करने के बाद भी बिहार के चार छात्र कुछ दिन पहले तक इस बात को लेकर मुतर्मइन नहीं थे कि वो देश के सर्वोच्च इंजीनियरिंग संस्थानों में एडमिशन ले भी पाएंगे या नहीं, क्योंकि उनके पास आईआईटी की फीस जमा करने तक के लिए भी पैसे नहीं थे।
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लेकिन देश में दरियादिल लोगों की कोई कमी नहीं है, उनके शिक्षक और मशहूर गणितज्ञ आनंद कुमार की एक अपील पर देशभर से लोगों ने दो घंटे में ही पांच लाख रुपए उन छात्रों के लिए इकट्ठे कर दिए।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार बिहार निवासी आनंद कुमार के सुपर 30 में तैयारी करने वाले छात्र समस्तीपुर निवासी धनंजय कुमार, मधेपुरा निवासी सुजीत कुमार, नालंदा निवासी प्रेमपाल कुमार और रोहताश निवासी श्रवण कुमार हाल ही में आईआईटी का एंट्रेस पास करने के बाद भी फीस के पैसे न होने के कारण परेशान थे।
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आनंद कुमार ने की थी मदद करने की अपील

आनंद कुमार ने बताया कि धनंजय के पिता सूरत मिल में काम करते थे लेकिन ‌बीमार पड़ने के कारण उनकी नौकरी गई तो वो अपने गांव वापस लौट आए। सुजीत कुमार के पिता एक कुली का काम करते हैं जबकि प्रेमपाल कुमार के पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं।

रोहताश निवासी श्रवण कुमार के पिता खेती बाड़ी करते हैं। सभी छात्र ओबीसी से संबंध रखते हैं। जबकि ओबीसी और जनरल कैटेगरी के छात्रों को आईआईटी काउंसलिंग के दौरान 45 हजार रुपए जमा करने पड़ते हैं।

गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले इन छात्रों के परिजन इस फीस को देने में भी समर्थ नहीं थे। उनकी इस मजबूरी को समझा उनके गुरु आनंद कुमार ने। ‌उन्होंने इन चारों छात्रों की कहानी सोशल मीडिया में शेयर की तो दान देने वालों की बाढ़ सी आ गई।

देश विदेश से लोगों ने दिल खोलकर की मदद

लोगों ने देश और विदेश से दो घंटे में ही पांच लाख से ज्यादा की रकम आनंद कुमार द्वारा बताए गए खाते में जमा कर दी। कम से कम 500 लोगों ने इस नेक काम के लिए दान किया।

शुक्रवार को शुरू हुए इस अभियान के दो घंटे बाद ही हमें इस बात की घोषणा करनी पड़ी की हमें और रकम की जरूरत नहीं है। कमाल की बात ये रही कि जहां चारों छात्र हिंदू हैं और बिहार से ताल्लुक रखने वाले हैं वहीं इनकी मदद करने वालों में बड़ी संख्या मुस्लिम और बिहार से बाहर रहने वालों की है।

खासकर अमेरिका और भारत के चेन्नई-बंगलुरू से काफी संख्या में इन छात्रों के लिए मदद की गई। इनमें अधिकतम मदद 1.25 लाख और कम से कम 500 रुपए की रही।
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मदद पाकर बोले छात्र, नौकरी लगी तो हम भी करेंगे ऐसा

आनंद ने बताया कि फीस से बचने वाली रकम में से छात्रों के लिए कपड़े, जूते और किताबें खरीदी जाएंगे। सुपर 30 जल्द ही चंदे ‌में मिलने वाली सारी रकम का ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने वाला है।

लोगों के इस सहृदय रवैये पर खुश होते हुए आनंद कहते हैं कि देश के इन दानवीरों को मेरा सलाम। वहीं जब सुजीत से इस संबंध में बात की गई तो उनका गला भर्रा गया।

रुंधे गले से उन्होंने कहा कि एक समय मैं नहीं जानता था कि मैं कैसे फीस के लिए 45 हजार रुपए का इंतजाम कर पाउंगा मुझे लगा था कि मेरी मेहनत व्यर्थ जाने वाली है। उन्होंने मदद करने वालों का धन्यवाद दिया। उसने बताया कि वह अपने गांव पुरैनी बाजार का अकेला व्यक्ति है जो आईआईटी में जाएगा।

आईआईटी खडगपुर में इलेक्ट्रिक ब्रांच में एडमिशन पाने वाले धनंजय कुमार बताते हैं कि वह छह भाई बहनों में सबसे बड़ा है। वो कहते हैं कि जब मैं कमाने लगूंगा तो इसी तरह दूसरे जरूरतमंद लोगों की मदद करके इस कर्ज को उतारने का प्रयास करूंगा।
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