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तो क्या नीतीश का डीएनए बदल गया?

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इफ्तार पार्टी के दौरान तेजस्वी-नीतीश - फोटो : Facebook
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राजनीति के ऊंट को जिधर मखमली रेत दिखती है वह उसी तरफ बैठ जाता है। बिहार में भी सुशासन के ऊंट ने भी एक ऐसी ही करवट ली है। वैसे तो हमारे सुशासन बाबू  बड़े ही सिद्धांतवादी हैं लेकिन मखमली सत्ता की चाहत ने उनका डीएनए ही बदल दिया है।
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बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जब पीएम ने बिहारियों के डीएनए को खराब बताया था और यहां तक कहा था कि बिहार की राजनीति के डीएनए में कुछ कमी है जिसके चलते उन्हें अपने साथी को छोड़ना पड़ा है।  पीएम के इस बयान के बाद तो सुशासन बाबू ने बिहारियों को ललकारा था और अपमान का बदला लेने के लिए  50,000 लोगों ने पीएम मोदी को अपना डीएनए सैंपल के रूप में बाल और नाखून भेजकर डीएनए टेस्ट  करने की बात की थी।

लेकिन पिछले कुछ दिनों की राजनीतिक हलचल देखने के बाद पता चला की सचमुच सुशासन बाबू का डीएनए बदल गया लगता है।

वहीं एक और सिद्धांत बाबू का ट्वीट याद आ रहा है। 
  . @SunilVChandak Bihar’s development is my sole agenda.जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग| चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग || — Nitish Kumar (@NitishKumar) July 21, 2015
दरअसल, "आस्क नीतीश" कार्यक्रम में एक शख्स ने ट्वीट कर नीतीश कुमार से  पूछा था, अगर आपको बिहार चुनावों में लालू यादव के साथ जीत मिलती है और लालू की पार्टी के सदस्य सही संख्या में जीत कर आते हैं तो क्या आप बिहार को अच्छे विकास वाली सरकार देने में कैसे कामयाब होंगे। 

इसी के जवाब में नीतीश कुमार ने ट्वीट कर दोहे की शक्ल में ये जवाब दिया कि जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग, चंदन विष व्याप्त‍ नहीं, लिपटे रहत भुजंग।

लेकिन देखिए, उस समय भी नीतीश बाबू ने एक ट्वीट से कई निशाने मारे थे। नीतीश ने सफाई दी थी और कहा था कि मैंने ये बीजेपी के लिए लिखा है कि कैसे मैंने सालों तक उनके साथ रहकर काम किया, लेकिन मेरे ऊपर बीजेपी की जहरीली विचारधारा का कोई फर्क नहीं पड़ा।

लेकिन अब दिख रहा है कि कैसे जहर जहर को काट रहा है। राजनीति के लिए बड़े बुजुर्ग कहते ही रहते हैं यहां पर सारे भाई मौसेरे हैं फिर जब बात सुशासन बाबू की हो तो ये कहावत चरितार्थ नजर आ रही है।

वैसे नीतीश कुमार समय समय पर बयान खूब बदलते रहे हैं। संघ मुक्त भारत की जरूरत वहीं मई 2016 में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नीतीश कुमार ने संघमुक्त भारत और शराब मुक्त भारत का नारा दिया था।

इसी वर्ष अप्रैल माह में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से संघ मुक्त भारत की बात करते हुए कहा था कि अब ऐसी परिस्थिति में आज सीधे दो धुरी होगी, भाजपा एक तरफ है और दूसरी तरफ सब लोगों को मिलना पड़ेगा। वरना अलग-अलग रहेंगे तो अलग-अलग ये सबका बुरा हाल कर देंगे, ये सबको एकत्रित होना होगा। 

नीतीश जी समय समय पर अपनी मखमली रेत पर करवट बदलते रहे हैं। एक बार लोहियाजी ने गैर कांग्रेसवाद की बात की थी, आज वही दौर आ गया है जब आपको गैर संघवाद करना पड़ेगा। इसके लिए सबको एकजुट खड़ा होना होगा। संघ मुक्त भारत बनाने के लिए सभी गैर भाजपा पार्टी को एक होना होगा।

नीतीश कुमार ने पटना में 24 सितंबर 2015 को अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि भाजपा के लिए आरएसएस सुप्रीम कोर्ट की तरह है। भाजपा विकास की बात करती है, लेकिन वह लोगों को बांटने का काम करती है, वह धर्म और जाति के नाम पर लोगों को बांटने का काम करती है।
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कभी टोपी पहननी पड़ेगी, कभी तिलक लगाना पड़ेगा

कभी टोपी पहननी पड़ेगी, कभी तिलक लगाना पड़ेगा 6 अगस्त 2013 को भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के राष्ट्रीय कांफ्रेंस में बोलते हुए कहा था कि आज  हवा की बात होती है, ये कुदरत की हवा है ,लेकिन वो ब्लोअर की हवा है। 

नीतीश ने यह बयान मोदी लहर पर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत जैसे देश को आगे ले जाने के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा, कभी टोपी भी पहननी पड़ेगी, कभी तिलक भी लगाना पड़ेगा। 
नीतीश कुमार के इस बयान को पीएम मोदी के खिलाफ माना जा रहा था, जब पीएम ने 2011 में एक कार्यक्रम के दौरान टोपी पहनने से इनकार कर दिया था।
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