परिजनों से मुलाकात कर रहे राजनीतिक दल
- फोटो : अमर उजाला
नेताओं का लगा रहा तांता
घटना के बाद मृतक के घर पर पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों का जमावड़ा लगा हुआ है। इस घटना को लेकर विपक्ष ने बिहार सरकार पर जमकर हमला किया है। विपक्ष इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि 'सुनियोजित हत्या' बता रही है। विपक्ष ने कहा कि पुलिस ने सुपारी किलर गिरोह की तरह काम किया है, इसलिए निष्पक्ष जांच कर आरोपी पुलिसवालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
- राजद : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे फेक एनकाउंटर बताया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह फेक एनकाउंटर है। मुख्यमंत्री को इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। बिहार में पहले भी जाति देखकर फर्जी एनकाउंटर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गायघाट व मधुबनी जैसे मामलों में आज तक न्याय नहीं मिला।
- राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच विधानमंडल के सदस्यों की एक सर्वदलीय कमेटी बनाकर कराई जानी चाहिए।
- कांग्रेस : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने सरकार की पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने किसी संगठित सुपारी किलर गिरोह की तरह इस घटना को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी सामाजिक कार्यकर्ता थे और वंचितों की आवाज उठाने के कारण सरकार की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और विधानसभा की सर्वदलीय समिति से जांच कराने की मांग की।
- कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार की न्यायिक जांच की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिटायर्ड जज की जांच से क्या हासिल होगा? उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब बिहार में भी फर्जी एनकाउंटर का खेल शुरू हो गया है। राज्य में संविधान नाम की चीज नहीं बची है। सरकार को हाई कोर्ट के सीटिंग जज से इसकी जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस जल्द ही राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी।
- माकपा : ललन चौधरी (माकपा के राज्य सचिवललन चौधरी ने कहा कि बिहार में अपराध बेलगाम है और सरकार इसे रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। प्रशासन आंदोलनकारियों और आम नागरिकों पर दमन का रास्ता अपना रहा है।
- पूर्व विधायक राजन तिवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया। वहीं पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
घटनास्थल पर जायजा लेते केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे
- फोटो : अमर उजाला
सत्ता पक्ष की जदयू और भाजपा भी नाराज
हैरानी की बात यह है कि इस एनकाउंटर पर सरकार की अपनी सहयोगी पार्टियों ने भी पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस संबंध में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि चार पुलिसकर्मियों के निलंबन से क्या होगा? उन्होंने कहा कि एनकाउंटर का जो वीडियो सामने आया है, वह पुलिस की थ्योरी पर कई गंभीर सवाल और गहरे संदेह पैदा करता है।
- भाजपा नेता अश्विनी चौबे भी भरत तिवारी के घर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन सरकार को गुमराह करना बंद करे। 48 घंटे के भीतर दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो और ग्रामीणों व परिजनों पर दर्ज किए गए मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।
- विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि मैं जल्द ही इस मामले में त्वरित न्यायिक जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करूँगा।
एडीजी ने मानी पुलिस की गलती, फिर भी सस्ती सजा क्यों?
बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब एक पुलिस अधिकारी ने यह बात मानी कि इस मामले में पुलिस ने लापरवाही की है। एडीजी सुधांशु कुमार ने कहा कि एनकाउंटर से पहले 16 जून को जो पुलिस टीम भरत भूषण तिवारी से बात करने गई थी, वह स्थिति को ठीक से हैंडल करने में नाकाम रही। पुलिस की इस घोर लापरवाही पर कड़ा एक्शन लेते हुए विभाग ने एक थाना प्रभारी, दो सब-इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर और एक कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया है।
यह खबर भी पढ़ें-Bihar News: 'निशांत कुमार ही करेंगे जदयू का नेतृत्व', नीतीश कुमार के करीबी संजय और श्रवण ने बता दी सारी बात
लाइव एनकाउंटर से पुलिस की थ्योरी बिलकुल अलग
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की थ्योरी अलग क्यों ?
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस प्रशासन ने पुलिस की गलती मानी जरुर लेकिन कहानी अपनी सुनाई। भोजपुर पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला 16 जून 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ। वीडियो में एक शख्स हाथ में पिस्टल लेकर इलाके में भय का माहौल पैदा करता हुआ दिखाई दे रहा था। वायरल वीडियो की सत्यता की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए जब पुलिस ने कदम बढ़ाया, तो उक्त व्यक्ति की पहचान शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी काशीनाथ तिवारी के पुत्र भरत भूषण तिवारी के रूप में हुई। पहचान होने के बाद शाहपुर थानाध्यक्ष पुलिस टीम के साथ बिलौटी गांव पहुंचे और आरोपी को नियंत्रण में लेने का प्रयास किया। लेकिन भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण करने के बजाय एक लोडेड पिस्टल को खतरनाक तरीके से लहराना शुरू कर दिया और बार-बार पुलिस टीम को खुलेआम चैलेंज किया। पुलिस द्वारा काफी समझाने-बुझाने के बाद भी वह काबू में नहीं आया।
छत से की फायरिंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए 16 जून की ही आधी रात अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी जगदीशपुर और शाहपुर थानाध्यक्ष ने भारी पुलिस बल के साथ आरोपी के घर पर छापेमारी की। पुलिस टीम को देखते ही भरत भूषण तिवारी छत पर चढ़ गया और गालियां देते हुए अवैध हथियार से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। लगातार आत्मसमर्पण की अपील के बाद भी जब फायरिंग नहीं रुकी, तो स्थिति को संभालने के लिए भोजपुर एसटीएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया। एसटीएफ ने रात में ही पूरे घर को घेर लिया और उस पर पैनी नजर बनाए रखी।
बधार की ओर भागते हुए मुठभेड़
पुलिस ने बताया कि अगले दिन यानी 17 जून 2026 की सुबह करीब 09:00 बजे मौका पाकर भरत भूषण तिवारी अपने घर से निकलकर खेतों की तरफ भागने लगा। पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और हथियार डाल देने को कहा, लेकिन वह दौड़ते हुए भी पुलिस पर लगातार रुक-रुक कर गोलियां बरसाता रहा। इससे पुलिसकर्मियों और आम जनता की जान पर बड़ा खतरा बन गया। आखिरकार, आत्मरक्षा और विधि-सम्मत कार्रवाई के तहत पुलिस टीम ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें भरत भूषण तिवारी के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। गोली लगने से घायल भरत भूषण तिवारी को पुलिस ने तुरंत इलाज के लिए रेफरल अस्पताल, शाहपुर में भर्ती कराया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सदर अस्पताल, आरा भेजा गया। हालांकि, हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे तुरंत पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान 17 जून को ही उसकी मौत हो गई।
आवेदन के बाद भी दर्ज नहीं हुई FIR, डिलीट किया डाटा
भरत भूषण तिवारी के पिता और भाई ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के तुरंत बाद 18 जून को ही भरत की मां आशा देवी ने आरा सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था, जिस पर शाहपुर सब-इंस्पेक्टर के हस्ताक्षर भी हैं। इसके बावजूद अब तक पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस भरत का मोबाइल फोन अपने साथ ले गई थी और बाद में उसका सारा वीडियो और जरूरी डाटा डिलीट करके फोन वापस लौटाया है। मां ने सरकार से गुहार लगाया है कि डीएसपी और थानाध्यक्ष सहित आरोपी हत्यारों को फांसी की सजा मिले।
यह खबर भी पढ़ें-Bihar News : एनकाउंटर में युवक की मौत के बाद भारी बवाल, पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने पर हुआ लाठीचार्ज