शत्रु से जब ये सवाल पूछा गया कि क्या आप आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी का चेहरा बनेंगे तो उन्होंने कहा कि मैं अपने चाहते वालों का शुक्रिया अदा करता हूं जो ऐसा चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी में मेरे पास कोई पद नहीं है लेकिन कद है और ये व्यक्तिगत कद है, जैसे लता मंगेशकर की आवाज ही उनकी पहचान है ऐसे ही मेरा व्यक्तित्व मेरी पहचान है।
शत्रु ने कहा कि अगर पार्टी मुझे किसी योग्य समझती है, जिम्मेदारी देती है तो मैं उसे निभाने के लिए तैयार हूं, हालांकि मेरी ऐसी कोई खुद की इच्छा नहीं है।
उन्होंने कहा कि मैं देख रहा हूं कि ऐसी मांग जोर पकड़ रही है, अगर पार्टी मुझे लायक समझती है तो मैं जिम्मेदारी निभाने तो तैयार हूं...प्रदेश हित में, देश हित में और जनहित में।
हमारा विरोधी हमारा दुश्मन नहीं है
बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा ने अमर उजाला से खास बातचीत करते हुए कहा कि जहां पूरे देश में भाषा का संयम खोया जा रहा है वहीं पटना में ऐसा नहीं है। उन्होंनें कहा कि हम ये समझते हैं कि हमारा विरोधी हमारा दुश्मन नहीं है।
बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व अभिनेता ने कहा कि सामने चुनाव लड़ रहा शख्स हमारा विरोधी हो सकता है लेकिन वो हमारे ही समाज से है, हमारे ही देश से है, हमारे ही घर से है।
उन्होंने कहा कि पटना में एक दूसरे का सम्मान किया जा रहा है और किसी ने भी भाषा का संयम नहीं खोया है। हालांकि नतीजे क्या होंगे ये तो १६ मई को ही पता चलेगा।
पटना साहिब सीट पर शत्रु के सामने चुनौती
बिहार की पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा के सामने चुनाव लड़ रहे हैं कांग्रेस की ओर से कुणाल सिंह और आम आदमी पार्टी ती ओर से परवीन अमानुल्लाह।
कुणाल सिंह जाने माने भोजपुरी सितारे भी हैं और परवीन बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री थीं।
शत्रु के प्रचार में उनकी पत्नी पूनम सिन्हा पसीना पहा रही हैं लेकिन उनकी बेटी और मशहूर अदाकारा सोनाक्षी उनके लिए प्रचार में शरीक नहीं हो पाई हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं जबकि 2009 के लोकसभा चुनाव में वे पटना साहिब सीट से लोकसभा का चुनाव जीते थे।
पटना में हुआ था शत्रु का विरोध
शत्रुघ्न सिन्हा को जब पटना साहिब से टिकट दिया गया और वो पटना आए तो कुछ लोगों ने काले झंडे दिखा कर उनका विरोध किया। गौरतलब है कि शत्रु को इस बार पटना साहिब से टिकट दिए जाने पर पार्टी में एकराय नहीं थी।
पार्टी का एक धड़ा बीजेपी के दिग्गज नेता और पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद के लिए पटना साहिब से टिकट चाहता था, जबकि शत्रु को दिल्ली से लड़ाए जाने की चर्चा थी।
इस पूरे विवाद के बावजूद शत्रु इस सीट के लिए अड़े रहे और उनको टिकट मिला भी लेकिन पटना आते ही उनका स्वागत काले झंडों से किया गया।
पहले आडवाणी अब मोदी
शत्रुघ्न सिन्हा को आडवाणी गुट का माना जाता रहा है, वे कई मर्तबा खुले मंच से आडवाणी का समर्थन कर चुके हैं। लेकिन टिकट मिलने के बाद सिन्हा के सुर बदल गए और उन्होंने मोदी को एक्शन हीरो बता दिया।
उन्होंने मोदी का विरोध भी किया था लेकिन टिकट मिलने के बाद उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य मोदी को पीएम बनाना है, ठीक ऐसे ही जैसे अर्जुन का ध्यान मछली की आंख पर था।