कांग्रेस की प्रासंगिकता में गिरावट जरूर आई है लेकिन बिहार की राजनीति में उन्हें पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता। बिहार में कांग्रेस 1990 से ही सत्ता से बाहर है।
इस दौरान हुए लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी एकाध सीटें जीत सकी है। बावजूद इसके बिहार की राजनीति में कांग्रेस की प्रासंगिकता कायम है। अपने सबसे खराब दौर में भी कांग्रेस के पास 9 से 10 फीसदी वोट बैंक है।
इससे अहम बात ये है कि ये 10 फीसदी मतदाता विभिन्न समुदायों के हैं, किसी एक या खास समुदाय के नहीं। किसी क्षेत्र के चुनावी समीकरण और उम्मीदवार की पहचान को देखते हुए मुस्लिम और दलित मतदाताओं का अच्छा खासा वर्ग कांग्रेस को वोट दे सकता है।