राज्य में डेंगू के बढ़ते मामलों से निबटने के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास विभाग और पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट संयुक्त रूप से अभियान चलायेंगे। अब तक राज्य में 420 मरीजों की जांच की गयी। इनमें से 249 डेंगू से पीड़ित पाये गये, जिनमें दो की मौत हो चुकी है। मंगलवार को तीनों विभागों की उच्चस्तरीय आपात बैठक हुई, जिसमें बीमारी से बचाव के लिए विभिन्न कदम उठाने के संबंध में निर्णय लिया गए।
स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि भागलपुर व पटना जिलों को छोड़ कर सात अन्य जिलों में डेंगू केबहुत कम मरीज पाये गये हैं। जिन जिलों में मरीज मिले हैं, वहां मच्छरों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने इसके लिए रेड एलर्ट जारी करने की बात से इनकार कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि भागलपुर के सूजापुर व नुजापुर में तीसरी तरह की बीमारी पायी गयी है, जो अज्ञात नहीं है। उसकी जांच के लिए आरएमआरआइ से दो विशेषज्ञों की टीम भेजी गयी है। डेंगू से निबटने के लिए स्वास्थ्य विभाग जांच व इलाज का काम कर रहा है। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (पीएचइडी) व लोक स्वास्थ्य संस्थान (पीएचआई) पानी के नमूनों की जांच कर रहा है। नगर विकास व पीएचइडी सफाई और दवा छिड़काव का काम करेगा। वहीं, जागरूकता अभियान में यूनिसेफ सहयोग करेगा।
प्रमुख स्टेशनों पर लगेगा कैंप
सात नवंबर से दीपावली व छठ के अवसर पर घर लौटनेवाले लोगों की जांच व इलाज के लिए प्रमुख स्टशनों पटना, भागलपुर, गया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर में कैंप लगाये जायेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें एक मरीज गया के और दूसरे सीवान के थे। दोनों की मौत लखनऊ में हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी, नगर विकास विभाग के सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ और पीएचइडी विभाग के संयुक्त सचिव के साथ निदेशक प्रमुख डॉ. सुरेंद्र प्रसाद, स्वास्थ्य समिति के अपर निदेशक डॉ. डीके रमण ने भाग लिया।