'यह पेटेंट विश्वविद्यालय के अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर'
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समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मशरूम पनीर और उसके उत्पादन की तकनीक पर विश्वविद्यालय को पेटेंट प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने इसे विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने मशरूम वैज्ञानिक डॉ. दयाराम और उनकी टीम को इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पेटेंट विश्वविद्यालय के अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर है।
अनुसंधान में क्रांति का संकेत
कुलपति डॉ. पांडेय ने कहा कि यह उपलब्धि वैज्ञानिकों में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करेगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अब वैश्विक चुनौतियों को समझकर अनुसंधान में नवीनतम तकनीकों का प्रयोग कर रहा है, जिससे देश को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाया जा सके।
तेजी से बढ़ रहा पेटेंट का आंकड़ा
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. मयंक राय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विश्वविद्यालय को 11 पेटेंट मिल चुके हैं। जबकि इससे पहले के पूरे इतिहास में केवल दो पेटेंट ही प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अब किसान केंद्रित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे समाज को सीधा लाभ पहुंचेगा।
कुलपति का नेतृत्व बना प्रेरणा स्रोत
निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की क्षमता को कुलपति डॉ. पांडेय ने सही दिशा में निर्देशित किया है। यही कारण है कि अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को लगातार सफलता मिल रही है। पेटेंट की इस बड़ी उपलब्धि पर विश्वविद्यालय में उत्सव का माहौल है। निदेशक शिक्षा डॉ. उमाकांत बेहरा, डीन इंजीनियरिंग डॉ. राम सुरेश राय, डीन बेसिक साइंस डॉ. अमरेश चंद्रा सहित अन्य वैज्ञानिकों और पदाधिकारियों ने कुलपति और डॉ. दयाराम को बधाई दी।
किसानों को होगा सीधा लाभ
मशरूम पनीर की तकनीक से किसानों और उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे। इस तकनीक से न केवल मशरूम उत्पादकों को फायदा होगा, बल्कि यह देश में पोषण और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगा।