फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिहार: पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष, अब प्रदेश अध्यक्ष- प्रशांत किशोर ने 87 दिनों में भाजपाई दिग्गजों का रंग उतारा

Wed, 28 Oct 2026 04:52 PM IST
Kumar Jitendra Jyoti न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

MLC Election Result : बिहार विधानसभा के बाद अब विधान परिषद् में भी जन सुराज पार्टी के प्रतिनिधि बैठेंगे। विधानसभा उप चुनाव में प्रशांत किशोर ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की छोड़ी सीट हासिल की। अब प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में भी जन सुराज ने जीत हासिल की है।
विज्ञापन
भाजपा के लिए खतरे की घंटी लगातार तेज होती जा रही है। - फोटो : amar ujala digital
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छाती पर मूंग दलना- अगर इस कहावत का अर्थ भूल गए हों तो बिहार विधान परिषद चुनाव के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी के सामने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज का प्रदर्शन देखिए। नवंबर में बिहार विधान सभा में 202 सीटें जीतने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सामने उस समय जन सुराज का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। तमाम दावे हवा हो गए थे। लेकिन, जब बांकीपुर से भारतीय जनता पार्टी विधायक चुने गए नितिन नवीन को कार्यकारी और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाते हुए राज्यसभा भेजा तो बिहार विधान सभा में उनकी सीट खाली हुई। इस खाली सीट पर जन सुराज के सर्वेसर्वा प्रशांत किशोर उतरे और 1995 के बाद पहली बार यह सीट भाजपा से छीन ली। अब, आठ सीटों पर विधान परिषद् का चुनाव हुआ तो प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के गृह जिले में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जीत हासिल की। वह भी भाजपाई नेता को मौका देकर।

विज्ञापन


जन सुराज का रुख सबसे कड़ा
अभी सदन में प्रशांत किशोर का रूप देखना बाकी है। वह 87 दिन पहले, 3 अगस्त को बांकीपुर विधायक बने थे। तब से सदन में वैसा अवसर नहीं आया है। बाहर प्रशांत किशोर सबसे कड़ा रुख अपनाते हैं। अब विधान परिषद् में भी उनकी पार्टी की सीट हो गई है। दोनों सीटें इसलिए भी ज्यादा मायने रखेंगी, क्योंकि एक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की छोड़ी थी और दूसरी प्रदेश अध्यक्ष के जिले की। प्रशांत किशोर खुद को पीएम-सीएम मेकर कहते रहे हैं, अब वह सदन में यह भी कहें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को मैंने हराया और प्रदेश अध्यक्ष के क्षेत्र में हमारे प्रत्याशी ने उनकी छाती पर मूंग दला तो कोई आश्चर्य नहीं। 

निर्दलीय में भारी पड़ रहे थे, मौका नहीं दिया भाजपा ने
दरभंगा शिक्षक सीट से सुरेश राय का जीतना वैसे भी भाजपा के पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में लाता है। सुरेश राय बेगूसराय के रहने वाले हैं। बेगूसराय की शैक्षणिक गतिविधियों में वह आगे रहे और प्रेरक कार्यक्रमों में उनका संबोधन लोग सुनते रहे हैं। वह शिक्षक नेता के रूप में पहचान भी रखते हैं। दो बार सुरेश राय निर्दलीय इस चुनाव में उतर कर राष्ट्रीय दलों के नेताओं को धमक दिखा चुके थे। वह भी तब, जबकि मन से शुरुआती भाजपाई थे। इस चुनाव में जन सुराज का टिकट पाने से पहले वह भाजपा में ही थे। टिकट के लिए प्रयासरत भी। लेकिन, भाजपा के टिकट बंटवारे की प्रणाली में न उनकी उम्मीदवारी को भाव दिया गया और ना ही पिछले प्रदर्शन को। नतीजा, जन सुराज का साथ मिला और भाजपा को उसके इस गढ़ में भी जोर का झटका लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

(इनपुट- रितेश सिन्हा, दरभंगा)

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें