दरभंगा में दीक्षांत समारोह को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान ने दिल्ली ब्लास्ट मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय से आतंकी गतिविधियों का संचालन बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह शिक्षा के मूल उद्देश्य और सामाजिक जिम्मेदारी के पूर्ण विपरीत है।
MBBS डॉक्टर की संलिप्तता पर राज्यपाल का गंभीर सवाल
राज्यपाल ने एक MBBS डॉक्टर के ऐसे कृत्य में शामिल होने को अत्यंत चिंताजनक बताया। उनके अनुसार मानव के अंदर दिव्यता के साथ-साथ विनाशकारी प्रवृत्ति भी मौजूद होती है, लेकिन संस्कार और समझ यह तय करते हैं कि व्यक्ति किस दिशा में जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी सोच को ही पूर्ण सत्य मानते हैं और दूसरों को उसे मानने के लिए मजबूर करने की प्रवृत्ति विकसित कर लेते हैं, जो सीधे-सीधे विनाश का रास्ता खोलती है।
‘ज्ञान ताकत देता है, लेकिन संस्कार दिशा देते हैं’
उन्होंने कहा कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि संस्कारहीन हो जाए, दायित्व न समझे और मर्यादाओं को न पहचाने तो उसकी विनाश करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे लोग मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं। इसलिए समाज और कानून दोनों के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे तत्वों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि यह संदेश स्पष्ट जाए कि किसी की जान के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है।
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भारतीय संस्कृति में ‘संस्कार’ की केंद्रीय भूमिका
राज्यपाल ने बिना नाम लिए कहा कि ऐसी घटनाएं जहां भी हुई हों, वे शिक्षा की कमियों और संस्कारहीनता का परिणाम हैं। भारतीय संस्कृति में केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कार को भी समान महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी पहली पाठशाला मां होती है, जबकि विद्यालय को ‘द्वितीय जन्म स्थल’ माना गया है, क्योंकि वहीं से व्यक्ति नए संस्कारों के साथ आगे बढ़ता है।