समस्तीपुर जिले में ठंड लगातार अपना कहर ढा रही है। इस बार ठंड ने बीते 27 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शाम के समय अधिकतम तापमान महज 14 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। कड़ाके की ठंड के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
बढ़ते ठंड के प्रकोप को देखते हुए समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बड़ा फैसला लिया है। डीएम ने जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक की शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। आदेश के मुताबिक 3 जनवरी तक सभी स्कूल बंद रहेंगे।
हालांकि ठंड को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम की तैयारियां सवालों के घेरे में हैं। जिले के चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। अलाव की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत से बार-बार अनुरोध के बावजूद अलाव नहीं जलाया जा रहा है। मजबूरी में लोग खुद लकड़ी, कचरा और पुराने टायर जलाकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना और प्रदूषण का खतरा भी बढ़ गया है।
सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों, रिक्शा चालकों, ठेला-खोमचा लगाने वालों और रात में ड्यूटी करने वाले लोगों को हो रही है। लोगों का आरोप है कि अलाव की व्यवस्था कागजों में दिखाकर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जबकि किसी स्तर पर निगरानी नहीं हो रही है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर अलाव व्यवस्था की जांच कराई जाए और सभी प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड और रिहायशी इलाकों में नियमित अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को इस भीषण ठंड से राहत मिल सके।