मो. अली अशरफ फातमी
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पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता मो. अली अशरफ फातमी ने 9 जुलाई को प्रस्तावित बिहार बंद को लेकर दरभंगा परिसदन में महागठबंधन नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने आम लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि यह बंद जनता की आवाज है और बिहार के करोड़ों मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। फातमी ने आरोप लगाया कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर कमजोर और पिछड़े वर्गों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि क्या बिहार के करोड़ों लोग अपने पसंद का विधायक या मुख्यमंत्री नहीं चुन पाएंगे? इलेक्शन कमीशन पर केंद्र सरकार का दबाव साफ दिख रहा है। आयोग ने जो फैसले लिए हैं, वे लोकतांत्रिक और न्यायसंगत नहीं हैं। पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि जब 2024 में ही लोकसभा चुनाव हो चुके हैं और जनता ने अपना वोट डाल दिया है, तो अब फिर से उन मतदाताओं को साबित करना होगा कि वे सही वोटर हैं या नहीं?
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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर बिहार का वोटर फर्जी है तो फिर पूरे देश की सरकार को इस्तीफा देकर नए सिरे से चुनाव करवाना चाहिए। रिवीजन का मकसद सिर्फ बिहार चुनाव को प्रभावित करना है। अगर मतदाता सूची में सुधार ही करना था तो पूरे देश में एक साथ करते। सिर्फ बिहार में क्यों? फातमी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण संभव ही नहीं है और खुद चुनाव आयोग के पास भी इसका कोई तार्किक जवाब नहीं है।