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Bihar News: आजादी के बाद पहली बार बिथान से छुक-छुक चली ट्रेन, पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी

Thu, 24 Apr 2025 02:39 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर

सार

Bithan-Samastipur Railway Station: देश की आजादी के बाद पहली बार बिथान से ट्रेन रवाना हुई। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। बता दें कि साल 1972 में स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा सर्वे का शुभारंभ किया था। वहीं, 1997 में स्वर्गीय रामविलास पासवान ने शिलान्यास किया था।
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बिथान से समस्तीपुर के बीच चली ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मिथिलांचल का ड्रीम प्रोजेक्ट हसनपुर-सकरी रेल परियाजना के तहत आखिरकार 50 साल बाद गुरुवार को वीडियो कॉफेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मधुबनी से बिथान-समस्तीपुर के बीच रेल सेवा की शुरूआत की। इस मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि के साथ ही वरीय रेलवे अधिकारी मौजूद रहे। इसके साथ ही आजादी के बाद पहली बार बिथान से ट्रेन सेवा की शुरूआत हुई, जिससे इलाके में जश्न का महौल है। अब इस इलाके के लोगों को बाढ़ के दौरान नाव की सवारी नहीं करनी होगी। पहले आवागमन की सुविधा सुलभ नहीं होने के कारण इस इलाके के लोगों को बाढ़ के दौरान हसनपुर आने के लिए नाव की एक मात्र सहारा था।  

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यहां बता दें कि हसनपुर-सकरी 79 किलोमीटर रेल परियोजना पर पिछले 50 साल से काम चल रहा है। हाल ही में रेलवे ने कुशेश्वर पक्षी विहार के कारण 50वें साल में जाकर कुशेश्वर पक्षी विहार के पास रेलवे लाइन का रूट बदल दिया है। हसनपुर से बिथान करीब 11 किलोमीटर रेल लाइन पिछले वर्ष ही बन कर तैयार हो गया था। सीआरएस ने निरीक्षण के दौरान ट्रेन चलाने की अनुमती भी प्रदान कर दी थी। लेकिन ट्रेन सेवा शुरू नहीं हो पाई थी।
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एक नजर में पूरी योजना का इतिहास
1951 में योजना के लिए जांच की गई, 1953 में रेलवे बोर्ड ने कहा कि बाढ़ के इलाके में यह संभव नहीं। 1972 में तत्कालीन रेलमंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा ने सर्वे की घोषणा की। इसी बीच समस्तीपुर स्टेशन पर बम विस्फोट में ललित बाबू की हत्या हो गई। इसके बाद इस योजना की फाइल बंद कर दी गई। 1997 में रेल मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान ने इस योजना को मिथिलांचल के विकास के लिये जरूरी बताते हुए पुन: फाइल खोली और फंड उपलब्ध कराकर शिलान्यास किया।

इस इलाके में रेलवे लाइन के बनने से आवागमन सुलभ होने से विकास की गति तेज होगी। चूंकि यह इलाका बाढ़ प्रभावित है। साल में छह महीना इस इलाके के लोग बाढ़ की पीड़ा झेलते हैं। लोगों के आवागमन की सुविधा सिर्फ नाव ही बचता है। उधर, रामविलास पासवान के रेल मंत्री से हटते ही कई वर्षों तक इस योजना को राशि नहीं मिली। लालू प्रसाद के रेल मंत्री बनने पर इस योजना को फंड मिलना शुरू हुआ। लेकिन दिसंबर 2008 में दरभंगा के तत्कालीन डीएफओ दीगंबर ठाकुर द्वारा कुशेश्वर स्थान पक्षी विहार के पास रेलवे लाइन के निर्माण पर रोक लगा दी गई।

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डीएफओ ने कहा, पक्षी विहार के पास से रेलवे लाइन के गुजरने से प्रवासी पक्षी को खतरा है। रेलवे लाइन बनाने की अनुमती नहीं दी जा सकती। तब से हरनगर से आगे हसनपुर की ओर रेलवे लाइन का निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। हालांकि, हसनपुर की ओर से रेलवे लाइन बनाना शुरू किया गया। अभी हसनपुर से बिथान 11 किलोमीटर रेलवे लाइन बनाई गई है। जबकि बिथाने से आगे कौराही, विरौल, कुशेश्वरस्थान तक रेलवे लाइन बनना बाकी है।  
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इस योजना के पूरा होने पर मिथिलांचल के इस इलाके में विकास के द्वारा खुलेंगे। वहीं, कोसी व मिथिलांचल की दूरी घट जाएगी। रेलवे लाइन से समस्तीपुर के अलावा खगड़िया व दरभंगा के लोगों को लाभ मिलेगा। उधर, दक्षिण बिहार के लोगों को मिथिलांचल में आना आसान होगा।

क्या है स्थिति
योजना पर दो चरणों में काम चल रहा है। इसके लिए अलग-अगल उप मुख्य अभियंता काम कर रहे हैं। पहले चरण में सकरी से कुशेश्वर स्थान के कार्य को बांटा गया था। सकरी से हरनगर तक रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। ट्रेन हरनगर तक चल भी रही है। दूसरे चरण में कार्य हसनपुर-कुशेश्वर स्थान की ओर चल रहा है, जिसमें हसनपुर से बिथान रेलवे लाइन आज प्रधानमंत्री ने शुरू की। पहले  यह योजना 79 किमी की थी। लेकिन कुशेश्वर पक्षी विहार के कारण रूट बदले जाने से अब यह योजना 81 किलोमीटर की हो गई है। 

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10 रेलवे स्टेशन का होना है निर्माण

इस योजना के तहत हसनपुर, बिथान, कौराही, विरौल, कुशेश्वरस्थान, हरनगर, नेडली, बेनीपुर, जगदीशपुर व सकरी को स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत सकरी, कुशेश्वस्थान व हसनपुर को जंक्शन के अलावा चार क्रॉसिंग स्टेशन, 45 रेलवे गुमटी व 82 छोटे-बड़े पुलों का निर्माण होगा।

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