फर्जी तरीके से जमीन की जमाबंदी करने के मामले में दरभंगा व्यवहार न्यायालय की सीजेएम अदालत ने बहादुरपुर अंचल की सीओ निश्चिल प्रेम, राजस्व कर्मचारी अर्चना भारती और सुधीर कुमार सिंह को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने दरभंगा के डीएम कौशल कुमार से भी इस मामले में विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया है।
परिवादी अधिवक्ता अरविंद कुमार सिन्हा का आरोप है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और कथित रूप से जाली दस्तावेजों के आधार पर उनकी जमीन से संबंधित दाखिल-खारिज वाद संख्या 459/24-25 का सृजन कर दिया गया। इसके बाद जमीन की जमाबंदी भी कायम कर दी गई, जबकि उन्होंने जमाबंदी के लिए अंचल कार्यालय में कोई आवेदन ही नहीं दिया था।
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बताया गया है कि अधिवक्ता ने तत्कालीन सीओ, राजस्व कर्मचारी, एक डेटा ऑपरेटर तथा एक अन्य व्यक्ति को नामजद करते हुए आपराधिक परिवाद दायर किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब 26 जून को करीब 100 लोगों का समूह राजमिस्त्रियों और मजदूरों के साथ उनकी जमीन पर पहुंचा और कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद सभी लोग वहां से फरार हो गए। इस घटना के बाद अधिवक्ता ने अदालत की शरण लेते हुए परिवाद दायर किया।
सीजेएम जुनैद आलम की अदालत ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए डीएम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही बहादुरपुर की सीओ निश्चिल प्रेम और संबंधित राजस्व अधिकारियों को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।