उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शामिल डीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। जूनियर डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी सेवा का बहिष्कार कर हड़ताल पर हैं। इससे इलाज के लिए सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी सहित पड़ोसी देश नेपाल से डीएमसीएच पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। हालांकि, डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने दावा किया है कि सीनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज शुरू कर दिया है, लेकिन उनका दावा गलत बताया जा रहा है।
समस्तीपुर से अपने भाई की गिल्टी का ऑपरेशन कराने आए बिजेंद्र कुमार ने बताया कि यहां आने पर हड़ताल होने की जानकारी मिली। अब वे भाई का इलाज कहां कराएं, यह समझ में नहीं आ रहा है। वहीं, इमरजेंसी विभाग का सीसीडब्ल्यू वार्ड पूरी तरह खाली पड़ा है।
मरीज को दिखाने को लेकर हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि बुधवार रात डीएमसीएच के मेडिसिन विभाग में मरीज को दिखाने को लेकर एक महिला परिजन और जूनियर डॉक्टर के बीच विवाद हो गया। जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि महिला परिजन ने डॉक्टर के साथ गाली-गलौज की। घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने विरोध जताते हुए काम का बहिष्कार कर दिया और हड़ताल पर चले गए। घटना की सूचना मिलते ही बेंता थाना की पुलिस डीएमसीएच पहुंची। पुलिस ने महिला परिजन को अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में स्थिति को नियंत्रित किया गया।
प्राचार्य और अधीक्षक ने संभाला मोर्चा
जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की जानकारी मिलते ही डीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. यूसी झा और अस्पताल अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जूनियर डॉक्टरों से बातचीत शुरू की और हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सीनियर डॉक्टरों से इलाज का दावा
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने के बावजूद सीनियर डॉक्टरों के माध्यम से मरीजों के इलाज की व्यवस्था जारी है। जरूरतमंद मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। हालांकि, ओपीडी और इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति का असर मरीजों की संख्या और व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।
दूर-दराज से पहुंचे मरीज परेशान
दरभंगा के अलावा सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, मधुबनी और आसपास के जिलों से इलाज के लिए डीएमसीएच पहुंचे मरीज और उनके परिजन परेशान हैं। इनमें पड़ोसी देश नेपाल से आए मरीज भी शामिल हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती हड़ताल समाप्त कर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करना है। अस्पताल प्रशासन और जूनियर डॉक्टरों के बीच बातचीत पर सभी की नजर बनी हुई है।