दरभंगा जिले के बेंता थाना क्षेत्र से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने नो-एंट्री में घुसी महिला डॉक्टर से न केवल बदसलूकी की, बल्कि खुलेआम मां-बहन की गाली-गलौज और धमकी भी दी।
मामूली ट्रैफिक उल्लंघन से बढ़ा मामला
वीडियो में कार में बैठी महिला डॉक्टर तेजस्विनी पांडे यह कहती नजर आ रही हैं कि यदि उनकी गाड़ी नो-एंट्री में चली गई है तो नियमानुसार जो भी फाइन बनता है, वह काट लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ड्राइवर से गलती हो गई है, लेकिन इसके बावजूद थानाध्यक्ष उनकी बात सुनने के बजाय लगातार अपशब्दों का प्रयोग करते रहे।
महिला डॉक्टर ने लगाए गंभीर आरोप
महिला डॉक्टर तेजस्विनी पांडे का कहना है कि मामूली ट्रैफिक उल्लंघन पर कानून के दायरे में कार्रवाई करने के बजाय दारोगा ने वर्दी का रौब दिखाया, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और डराने की कोशिश की। उनका कहना है कि सड़क पर मौजूद लोग पूरे घटनाक्रम के गवाह बने, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
प्रशासन ने किया मामले को सुलझाने का प्रयास
घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और महिला डॉक्टर के साथ बैठकर मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया। हालांकि बताया गया है कि मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा में व्यस्तता के कारण एसएसपी स्तर पर थानाध्यक्ष के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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थानाध्यक्ष ने रखी अपनी सफाई
बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार ने बताया कि संबंधित वाहन को पहले वनवे के दौरान रोका गया था। उनके अनुसार, वाहन चालक ने जानबूझकर गाड़ी थानाध्यक्ष और उनके साथ मौजूद सिपाही की ओर दौड़ा दी, जिससे दोनों बाल-बाल बच गए। उन्होंने कहा कि चालक तेज रफ्तार में वहां से फरार हो गया और बाद में जब वाहन को रोका गया तो चालक ने गाड़ी खोलने से इनकार कर दिया। इसी दौरान गुस्से में उनके मुंह से कुछ अपशब्द निकल गए, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। थानाध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि चालक ने जान से मारने की नीयत से वाहन चलाकर भागने की कोशिश की।
एसएसपी ने जांच का दिया आश्वासन
दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने कहा है कि वायरल वीडियो अभी उनके पास नहीं पहुंचा है। वीडियो देखने के बाद पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्दी के भीतर छिपा ऐसा गालीबाज और अमर्यादित रवैया कानून के दायरे में आएगा या फिर मामला जांच और फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।