विश्वविद्यालय में वीसी की नियुक्तियों में खुद की उपेक्षा का आरोप लगाने वाली बिहार सरकार अब राजभवन से सीधे दो-दो हाथ करने के मूड में दिख रही है। सरकार ने विवि में होने वाले खर्चों की मॉनीटरिंग के लिए स्पेशल सेल गठन का एलान किया है। तर्क है कि पैसा सरकार खर्च कर रही है तो उसे इसकी समीक्षा का भी अधिकार है।
सरकार का सीधा आरोप है कि राज्य के विवि में वीसी की नियुक्तियों में राजभवन उसकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर रहा है। 2011 में की गईं नियुक्तियों को सरकार की अपील पर हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था।
राजभवन ने फरवरी माह में फिर से नियुक्तियां कर दीं तो सीएम और शिक्षा मंत्री ने अपना विरोध सार्वजनिक भी किया। इन नियुक्तियों को एक पीआईएल के तहत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सरकार के मौजूदा रुख से लग रहा है कि वह विवि पर अपना कुछ न कुछ नियंत्रण चाहती है। इसके लिए सरकार अब राजभवन से भी टकराव के मूड में दिख रही है। दरअसल, एक भाजपा विधायक ने विवि को सरकार द्वारा दिए जा रहे तीन हजार करोड़ के सालाना अनुदान के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।
इस पर शिक्षा मंत्री पीके शाही ने सदन को बताया कि सरकार ने विवि के खर्चों की मॉनीटरिंग का फैसला किया। इसके लिए एक स्पेशल ऑडिट सेल का गठन किया गया है। यह सेल अप्रैल माह से अपना काम शुरू कर देगा। मालूम हो कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्तशासी संस्था है और इस पर सरकार का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता है। ये विवि कुलाधिपति के रूप में सीधे राज्यपाल के अधीन काम करते हैं।