बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं को बंद किए जाने की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि इसकी जगह पर सेंट्रल सेक्टर स्कीम चलायी जानी चाहिए यानि केंद्र सरकार देश में अगर कोई योजना चलाना चाहती है तो उसकी योजना हो।
अनुच्छेद 370 हटाये जाने की मांग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही अनुच्छेद 370 हटाये जाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि राम मंदिर का निर्माण अदालत के निर्णय से या लोगों की सहमति से होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह समान नागरिक संहिता को थोपे जाने के पक्ष में भी नहीं हैं।
केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में हम पहले ही जवाब दे चुके हैं। कहीं कोई समस्या नहीं है। बिहार के विकास के लिए, बिहार के हित के लिए किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आयेगी, मुझे ऐसा पूरा भरोसा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा पहले ही बहुत योजनाओं को मंजूरी दी गई है उसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। जब भी केंद्र के प्रतिनिधियों से बातचीत होती है उसका सदुपयोग हमलोग बिहार के हित के लिए करते हैं। नीति आयोग की बैठक में हमलोग बिहार के विकास के संबंध में अपनी बातें रखेंगे।
बिहार को विशेष राज्य के दर्जे के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वें वित्त आयोग ने अपने एक वाक्य से इसे खारिज कर दिया था लेकिन 15वें वित्त आयोग के समक्ष बिहार राजग के तीनों घटक दलों ने अपनी बात रखी है। अगले पांच वर्षो में बिहार को विकसित राज्य की श्रेणी में लाने के लिए हमलोग काम करेंगे।
बिहार के विपक्षी महागठबंधन के लोगों के प्रहार के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि न हम उनके आलोचनाओं पर ध्यान देते थे और नहीं जो वे आज कह रहे हैं उस पर ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के पहले से ही विरोधियों द्वारा मेरे बारे में कई बातें कही जाती थी, मैं उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था।
नीतीश ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान जनता के बीच हमलोगों ने अपनी बातों को रखा, हमनें 171 मीटिंग की। जनता ने अपना रिस्पांस दिया और जनता ने उन्हें कहां पहुंचाया आप सब जानते हैं।