राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने 7 जुलाई 2013 को बोधगया में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में शुक्रवार को इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के पांच आतंकियों को उम्र कैद की सजा सुना दी। इतना ही नहीं अदालत ने हर एक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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बता दें कि एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिन्हा ने इस मामले में बीती 25 मई को पांचों आरोपियों- इम्तियाज अंसारी, हैदर अली, मुजिबुल्लाह, उमर सिद्दीकी और अजहरुद्दीन कुरैशी को भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) एक्ट और विस्फोटक पदार्थ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था।
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जस्टिस सिन्हा ने दोषी हैदर अली पर उक्त 50 हजार रुपये के अलावा 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया। अपने फैसले में उन्होंने कहा कि यह प्रमाणित हुआ है कि हैदर अली बम धमाकों के कुछ ही देर पहले बोधि मंदिर में प्रवेश कर गया था।
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गौरतलब है कि अदालत ने इन सभी को सजा सुनाने के लिए 31 मई की तारीख तय की थी। लेकिन बृहस्पतिवार को सजा के बिंदु पर बहस पूरी नहीं हो सकी थी। कोर्ट में एनआईए के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी।
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चार साल 10 माह बाद शुक्रवार को एनआईए कोर्ट का फैसला आया है। पटना सिविल कोर्ट में 2013 में गठित एनआईए कोर्ट का यह पहला फैसला है।
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उक्त पांचों दोषियों के अतिरिक्त एक अन्य अभियुक्त तौफीक अहमद को इस मामले में किशोर न्यायालय ने पिछले साल अक्तूबर में दोषी करार देते हुए तीन साल के लिए बाल सुधारगृह भेज दिया था।
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उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 2013 को सुबह 5.30 से 6.00 के बीच महाबोधि मंदिर में एक के बाद एक नौ धमाके हुए थे। आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे दो बम लगाए थे।
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महाबोधि वृक्ष के नीचे सिलेंडर बम प्लांट किया था जिसमें टाइमर लगा था। इसमें कुछ बौद्ध भिक्षुओं समेत बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए थे। हालांकि इन धमाकों में किसी की मौत नहीं हुई थी।
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रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने को धमाके
एनआईए के मुताबिक, रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने के लिए दोषियों ने धमाके किए थे। ब्लास्ट के लिए हैदर ने रायपुर के सिमी सदस्य उमर सिद्दीकी से संपर्क किया था। हैदर ने बौद्ध भिक्षु बनकर मंदिर में प्रवेश किया और धमाके को अंजाम दिया था।
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बाल के डीएनए टेस्ट से सरगना तक पहुंची जांच एजेंसी
एनआईए की टीम को बौद्ध भिक्षु वाले कपड़े पर एक बाल मिला था। बाल के डीएनए टेस्ट से एनआईए को हैदर अली के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले। जांच एजेंसी का दावा है कि हैदर ने जब मंदिर में महाबोधि वृक्ष के पास बम रखा था तो वह यही कपड़े पहने था।
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इन इलाकों के आतंकियों ने घटना को दिया अंजाम
पहला गुनाहगार हैदर अली रांची के डोरंडा थाना के हाथीखाना का, दूसरा इम्तियाज अंसारी रांची के ध्रुवा थाने के सीटियों का, तीसरा मुजिबुल्लाह अंसारी रांची के ओरमांझी थाने के चकला गांव का, चौथा उमर सिद्दीकी रायपुर के राजा तालाब के नूरानी चौक का जबकि पांचवां आरोपी अजहरुद्दीन कुरैशी रायपुर के राजातालाब के नया बस्ती का रहने वाला है।
गांधी मैदान बम विस्फोट मामले में भी आरोपी हैं ये दोषी
27 अक्तूबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में हुए सिलसिलेवार धमाकों के मामले में भी तौफीक अहमद के अलावा उक्त पांचों आतंकी अन्य के साथ आरोपी हैं। ये धमाके तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी चुनावी रैली में हुए थे। इसमें छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि 89 लोग घायल हो गए थे।