बिहार के भागलपुर जिले की एक महिला घर से झगड़ा करके निकली और लॉकडाउन का शिकार हो गई। बांका जिले के अमरपुर जाने के लिए निकली यह महिला कानपुर पहुंच गई और वहां से 40 दिन पैदल चलकर झारखंड के हजारीबाग जिला पहुंची। यहां के अधिकारियों ने उसे उसके परिवार से मिलवाया।
दरअसल, 22 मार्च को बिहार के भागलपुर में अपने ससुराल में मामूली झगड़ा होने के बाद महिला घर से निकली और बांका जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंची। लेकिन वह जिस ट्रेन में सवार हुई वो उसे उत्तर प्रदेश के कानपुर ले गई।
जब कुछ लोगों ने उसे बताया कि वो कानपुर पहुंच गई है तो महिला के पास वापस घर लौटने के लिए पैसे नहीं थे। इस दौरान देश में लॉकडाउन लागू हो गया। लोगों ने उसे ग्रैंड ट्रंक रोड पर चलने के लिए कहा क्योंकि देशव्यापी लॉकडाउन के कारण परिवहन का कोई साधन नहीं था।
इसके बाद महिला ने घर वापस जाने के लिए अपनी यात्रा शुरू की। चार मई को झारखंड के हजारीबाग जिले के चोरदाहा में झारखंड-बिहार के अंतर-राज्यीय चेक पोस्ट के पास वह बीमार हो गई।
कुछ पुलिसकर्मियों ने महिला को अचेत अवस्था में पड़ा देखा। इसके बाद क्षेत्र के सर्कल अधिकारी शिवम गुप्ता के आदेश पर उसे हजारीबाग सदर के महेश्वरा इलाके में एक पुनर्वास केंद्र में भेज दिया गया, जहां उसका इलाज किया गया और उसके खाने-पीने की व्यवस्था की गई। हजारीबाग की समाज कल्याण अधिकारी शिप्रा सिन्हा ने ये जानकारी दी।
महिला का कोविड-19 टेस्ट भी किया गया, जो नेगेटिव आया। बाद में भागलपुर के अधिकारियों से संपर्क किया गया। वे मंडोर में मिर्जा चौक पर आए और महिला को एक कार से ले गए। अधिकारी ने बताया कि महिला 14 मई को अपने पति से फिर से मिली और दोनों बहुत खुश थे।
महिला ने सभी अधिकारियों को धन्यवाद दिया। उसने कहा कि मैंने घर लौटने की सारी उम्मीदों को खो दिया था, लेकिन अधिकारियों की मदद से एक बार फिर से मैं अपने परिवार से मिलकर बहुत खुश हूं।