अपनी मेधा के लिए मशहूर बिहार के छात्रों ने एक बार फिर गजब का कारनामा किया है। यहां के एक गांव के 18 छात्रों का चयन आईआईटी के लिए हुआ है। छात्रों की इस उपलब्धि पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है।
इससे पहले बिहार के ही आनंद कुमार का सुपर 30 इस तरह के कारनामे के लिए चयनित रहा है। जहां तीस गरीब छात्रों का चयन कर उन्हें आईआईटी की तैयारी करवाई जाती है। हर बार आनंद कुमार के सुपर 30 के छात्र आईआईटी में झंडे गाड़ते रहे हैं, इस बार भी उनके 30 में से 24 छात्रों का चयन आईआईटी के लिए हुआ है।
अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की खबर के अनुसार यह कारनामा किया है बिहार के गया के एक पिछड़े गांव बुनकरों के होनहार छात्रों ने। जिन्होंने आईआइटी के एग्जाम में शानदार सफलता पाई है।
हर साल चयनित होते हैं दर्जनभर छात्र
एग्जाम क्लियर करने वालों में एक छात्रा भी है। ऐसा नहीं है यहां के होनहारों ने यह कारनामा पहली बार किया है बल्कि यहां यह एक परंपरा के तौर पर है जहां हर साल कम से कम दस छात्र आईआईटी के लिए चयनित होते हैं।
इस बार आईआईटी के एग्जाम में 980 रैंक पाने वाले गांव के राहुल कुमार कहते हैं कि गांव में पढ़ाई का माहौल काफी अच्छा है। यहां सब छात्र एक दूसरे के साथ मिलकर पढ़ते हैं और जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद करते हैं।
दस हजार की आबादी वाले इस गांव के लगभग हर घर में पावरलूम है। लेकिन इसके जोरदार शोर और तमाम बाधाओं के बीच यहां के बच्चे आईआईटी में चयन के लिए कम से कम 3-4 घंटे की पढ़ाई करते हैं।
पूर्व में चयनित छात्र करते हैं नए स्टूडेंट्स की मदद
राहुल बताते हैं कि हमने पढ़ाई के लिए एक जगह खोज रखी है जहां सभी स्टूडेंट्स एक साथ तैयारी करते हैं। यहां हमें पढ़ाई का अच्छा माहौल मिल जाता है। बकौल राहुल उनके चाचा ने भी आईआईटी से पढ़ाई की थी और आज वो अमेरिका में नौकरी करते हैं।
गांव वाले बताते हैं कि अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए उन्होंने हथकरघा के अपने काम को भी कम कर दिया जिससे उनकी पढ़ाई बाधित न हो। लगभग 15 साल पहले उन्होंने अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए इस दिशा में प्रयास शुरू किए थे।
इस सवाल पर कि बिना अच्छे स्कूलों और कोचिंग सेंटर के ये बच्चे आईआईटी का एग्जाम कैसे क्लियर कर पाते हैं। गांव के ही योगेश्वर प्रसाद जिनके बेटे का भी इस बार आईआईटी में चयन हुआ बताते हैं कि जिन बच्चों का पूर्व में आईआईटी में चयन हुआ है वो इसमें उनकी मदद करते हैं।
वो एग्जाम की तैयारियों में उनके बच्चों की मदद करते हैं, और उन्हें शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए बकायदा एक एनजीओ का गठन किया गया है।