बिहार की प्रतिष्ठा पर दाग लगाने वाले टॉपर घोटाले पर गहराई से नजर डालने पर एक बात साफ नजर आती है कि बिहार की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में कुछ भी सही नहीं चल रहा था। बीते सालों में इस पर लगातार उंगलियां उठती रही हैं। पिछले साल जहां परीक्षा केंद्रों के छज्जों से लटककर बच्चों को नकल कराते अभिभावकों ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थी वहीं इस साल टॉपरों ने बोर्ड के मुंह पर कालिख पुतवा दी।
एसआईटी की जांच में एक एक कर रोज ऐसे खुलासे हो रहे हैं कि बोर्ड की पूरी प्रतिष्ठा और इसकी कार्यप्रणाली ही संदेह के घेरे में आ गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का यह गोरखधंधा इतने सालों तक बिना किसी शह के चलता रहा।
पूरी आशंका जताई जा रही है कि सत्ता से जुड़े लोगों का इस खेल में शामिल लोगों को पूरा वरदहस्त हासिल रहा है जिसकी बिना पर वह बिना किसी रोकटोक के खुलकर खेलते रहे। फिलहाल इस घोटाले के जिन दो बड़े किरदारों बच्चा राय और लालकेश्वर सिंह का नाम सामने आया है उनका भी सत्ता से गहरा कनेक्शन रहा है।
राजद का बड़ा नेता है मुख्य सूत्रधार बच्चा राय, एक फोन पर पुलिस ने छोड़ा
बोर्ड के सूत्र भी मानते हैं कि सत्ता की शह के कारण ही यह खेल सालों से बिना रोकटोक चलता रहा, खासकर बच्चा राय का बोर्ड में जलवा इस कदर था कि वो जो चाहे वो करवा लेता था। बच्चा राय उर्फ अमित सिंह उर्फ अमित यादव के बारे में कहा जाता है कि बोर्ड की पूरी व्यवस्था उसकी जेब में रहती थी। वह जिस तरह से चाहता अपना काम करवा लेता था, उसकी इस हनक के पीछे उसका सत्ता कनेक्शन बताया जाता है।
बच्चा राय वैशाली जिले में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का बड़ा पदाधिकारी है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव से भी उसकी काफी नजदीकी बताई जाती है। खबर ये भी है कि बुधवार को लगातार छापेमारी के बाद एसआईटी ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया था, पुलिस उसे जीप में बैठाकर चली तभी पटना से आए एक फोन ने उसे बैकफुट पर आने के लिए मजबूर कर दिया।
इसके बाद बच्चा राय आराम फरार हो गया। बच्चा राय की लालू यादव के दोनों बेटों से भी काफी नजदीकी बताई जाती है, जो पूर्व में उसके कई कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं।
जेडीयू की विधायक रही है पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह की पत्नी
वहीं घोटाले के दूसरे आरोपी बताए जा रहे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह ने फिलहाल अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वह फरार चल रहे हैं उनके बारे में कहा जा रहा है कि बोर्ड अध्यक्ष रहने के दौरान वह मनमाने तरीके से परीक्षा केंद्रों का आवंटन करते थे। खासकर बच्चा राय के कालेज पर उनकी खास मेहरबानी रहती थी।
लालकेश्वर सिंह का भी सत्ता से गहरा कनेक्शन सामने आ रहा है। लालकेश्वर सिंह मूल रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के रहने वाले हैं। खास बात ये है कि इनकी पत्नी उषा सिंह नालंदा जिले के हिलसा विधानसभा सीट से दोबार नीतीश की पार्टी जेडीयू की विधायक रह चुकी हैं। फिलहाल भी वह राजनीति में सक्रिय हैं और उनका जदयू में अच्छा खास प्रभाव बताया जाता है।
इसी प्रभाव के दम पर लालकेश्वर सिंह पिछले कई सालों से बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी पर टिके थे। पटना कालेज के प्रधानाचार्य से बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने वाले लालकेश्वर की भूमिका इसलिए भी संदिग्ध दिख रही है कि बोर्ड को पहले ही इस घोटाले की भनक लग चुकी थी जिसके बाद मामले की जांच के लिए चुपचाप न्यायिक समिति का गठन कर दिया गया, लेकिन कुछ दिन बाद ही इस समिति को समाप्त कर दिया गया।
अगर मामला इतना तूल न पकड़ता तो संभव था कि लालकेश्वर की कुर्सी पर आंच भी नहीं आती लेकिन फिलहाल उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।