बिहार में हुए टॉपर घोटाले ने जहां राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर कालिख पोत दी है वहीं यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि इस सारे घोटाले का असली सूत्रधार कौन है। विशुन राय कालेज का प्रधानाचार्य और संचालक बच्चा राय या फिर बोर्ड का अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह।
पुलिस की मानें तो इस सारे घोटाले की जड़ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति या बिहार विद्यालय बोर्ड के पटना ऑफिस में ही थी। और इसका असली सूत्रधार था बोर्ड का अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह। पटना के एसपी मनु महाराज ने गुरुवार को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं कि अध्यक्ष होने के नाते लालकेश्वर सिंह को इस पूरे घोटाले की जानकारी रहती थी।
पुलिस को बोर्ड ऑफिस और लालकेश्वर सिंह के ऑफिस में छापामारी के दौरान इस बात के सबूत हाथ लगे हैं। इसके बाद से ही लगातार उनकी तलाश की जा रही है। हालांकि अभी वह फरार चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बच्चा राय भी इस खेल का अहम प्यादा है।
छात्रों से सेटिंग करने का काम उसका ही होता था। वह उन्हें पास कराने से लेकर फर्स्ट और टॉप कराने तक की गारंटी देता था। इसके लिए बकायदा अलग अलग रेट तय थे। इसके लिए वह अपने विशुन राय कालेज के साथ साथ कुछ अन्य विद्यालयों से भी संबंध बनाकर रखता था।
वह पिछले दस सालों से इसी काम में जुड़ा है उसका एक बड़ा रैकेट इसी काम में जुड़ा है जो पूरे सूबे में इस तरह के छात्रों की तलाश करता है, जो बिना परीक्षा दिए ही पास होना चाहते हैं। ये ऐसे छात्रों को भी साथ जोड़ते थे जो परीक्षा तो देते थे लेकिन बाद में उनकी कॉपियां बदल दी जाती थी।