एक छात्रा के अटपटे जवाब के बाद सामने आए बिहार के टॉपर घोटाले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। मामले में जहां अभी तक पांच छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह और घोटाले के सूत्रधार बताए जा रहे विशुन राय कालेज के संचालक बच्चा राय फरार हैं।
पुलिस उनकी गिरफ्तारी और घोटाले की कड़ियां जोड़ने के लिए लगातार छापामारी कर रही है। गुरुवार शाम को एक बार फिर एसआईटी जांच करने के लिए हाजीपुर के विशुन राय कालेज पहुंची। तीन दिनों में यह पुलिस की यहां चौथी छापामारी है।
वहीं टॉपरों को लेकर देश में अपनी तरह के इस पहले घोटाले के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन छात्रों ने टॉप किया कैसे? क्या इसके लिए कुछ छात्रों को विशेष तौर पर नकल करवाई गई या फिर बोर्ड के सेंटर लगवाने में हेराफेरी की गई या इन सबसे इतर कोई अन्य तरीका अपनाया गया।
अभी तक की जांच में टॉप करवाने का जो सच सामने आया है वो थोड़ा चौंकाने वाला है। तो चलिए आपको तफशील से बताते हैं वो सच जिससे जुड़ा है टॉपर बनाने का वो खेल जिसने बिहार की पूरी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पर कालिख पोत दी है।
मूल्यांकन केंद्र पर बदल दी जाती थी कॉपियां
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- फोटो : bachha rai
परीक्षाओं में पास कराने या टॉप करने की हेराफेरी के जितने भी मामले सामने आते हैं उनमें ज्यादातर मामले नकल या सामूहिक नकल कराने के ही होते हैं। लेकिन बिहार में टॉप कराने के मामले में बिल्कुल अलग तरीका अपनाया गया जिससे कहीं पर भी शक की गुंजाइश न रहे और न ही चोरी पकड़ में आ सके।
असल में फर्जीवाड़े का यह सारा खेल बच्चा राय और बोर्ड अधिकारियों की शह पर खेला जाता था। बच्चा राय अपने कालेज विशुन राय कालेज का सेंटर अपनी मर्जी से लगवाता था। इसके बाद कॉपियां कहां चेक होनी हैं ये भी वह खुद ही तय करता था। परीक्षा होने के बाद जब सारी कॉपियां जांच होने के लिए केंद्र पर पहुंच जाती थी तब ये सारा खेल शुरू होता था।
सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों को टॉप करवाना या नंबर अच्छे रखवाने होते थे उनकी कॉपियां बंडल में से ढूंढकर निकाल ली जाती थी। फिर उन कॉपियों के ऊपर के पिन खोलकर अंदर के पेज निकाल लिए जाते थे, फ्रंट पेज पहले वाला ही रखा जाता था।
इसी बीच एक व्यक्ति या छात्र इत्मीनान से सही सवालों के जवाब खाली उत्तर पुस्तिका में लिखते थे जिसके ऊपर का पेज उतारकर वापस पुरानी वाली कॉपी के फ्रंट पेज के अंदर डाल दिया जाता था। यह सारा काम इतने शातिर तरीके से किया जाता था कि कॉपी से छेड़छाड़ का अंदाजा लगाना मुश्किल होता था।
बोर्ड कर्मचारियों की मिलीभगत से होता था सारा खेल
खाली उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराने का काम बोर्ड के कर्मचारी करते थे। यही खेल पटना के राजेन्द्र नगर स्थित बालक उच्च विद्यालय में भी चला। विशुन राय कालेज की कॉपियां यहीं चेक होने के लिए आई थी जिनमें बदलाव कर फर्जी तरीके से टॉपर पैदा कर दिए गए।
पुलिस ने विद्यालय के प्राचार्य विशेश्वर यादव और शिक्षक संजीव सुमन को भी गिरफ्तार कर लिया है। असल में फर्जीवाड़े का यह तरीका इतना फुलप्रूफ था कि
इसमें कॉपियां री चेक होने पर भी पकड़े जाने की गुंजाइश कम ही होती थी।
यही वजह थी कि बच्चा राय डंके की चोट पर दावा करता था कि जिस किसी को छात्रों के टॉप करने पर शक हो वो आरटीआई के माध्यम से कॉपियां चेक कर सकता है। लेकिन पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचना शुरू किया तो एक एक कर इस फर्जीवाड़े की परतें उधड़ती चली गई। पुलिस ने हाजीपुर के जीए इंटर कालेज की केन्द्राधीक्षक शैल कुमारी और कॉलेज के एक कलर्क औैर एक चपरासी को भी हिरासत में लिया था। मामले की जांच कर ही एसआईटी के निशाने पर बच्चा राय का विशुन राय कालेज ही है। जिस पर लगातार छापामारी की जा रही है। गुरुवार शाम को एक बार फिर टीम वहां जांच करने पहुंची।