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चुनाव खत्म होते ही बैकफुट पर शत्रुघ्न, क्या कहा?

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बिहार चुनावों के दौरान अपने बागी रुख से लगातार भाजपा की नाक में दम करने वाले पटना साहिब के सांसद शत्रुघन सिन्हा के सुर अब बदलते दिख रहे हैं। चुनाव खत्म के बाद जहां उन्होंने अपनी जुबान सिल ली है वहीं अपने पुराने बयानों पर भी सफाई देनी शुरू कर दी है।
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चुनावों के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री मोदी पर दिए एक बयान से पलटते हुए उन्होंने सफाई दी है कि वह बयान मीडिया के दिमाग की उपज है उन्होंने इस तरह का कोई बयान ही नहीं दिया है। न ही प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ वो इस तरह का कोई बयान दे सकते हैं।

चुनाव के दौरान ट्विटर से प्रधानमंत्री मोदी और अपनी पार्टी के नेताओं पर हमला करने वाले शत्रुघन सिन्हा ने ट्विटर से ही अब अपनी सफाई दी है। साफ है कि चुनाव खत्म होते ही शत्रुघन सिन्हा ने भी बैकफुट पर आना शुरू कर दिया है।
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क्या कहा था शत्रुघन सिन्हा ने

ताजा मामला शत्रुघन सिन्हा के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने बिहार चुनावों से पहले प्रधानमंत्री द्वारा घोषित किए पैकेज को चुनावी हथकंड़ा करार दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शत्रुघन ने कहा था कि जनता प्रधानमंत्री के इस चुनावी हथकंडे को समझ चुकी थी इसलिए उन्होंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी।

वहीं इस दौरान शत्रुघन ने पीएम पर चुटकी लेते हुए कहा था कि भाजपा ने जो 53 सीटें जीती हैं वो प्रधानमंत्री मोदी की वजह से ही हैं। इससे उनका आशय था कि पीएम मोदी की वजह से ही भाजपा की मात्र 53 सीटें आई हैं।

हालांकि अब उनके बयान पर विवाद शुरू हुआ तो उन्होंने इसका खंडन करने में भी देरी नहीं लगाई। ट्विटर पर अपनी सफाई देते हुए शत्रुघन ने कहा कि मीडिया  चल रही इस तरह की खबरें पूरी तरह आधारहीन हैं। कहा- ये कैसे हो सकता है कि बिहार के भले के लिए की गई प्रधानमंत्री मोदी की किसी भी गतिविधि पर वह उंगली कैसे उठा सकते हैं।
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भाजपा के लिए मुसीबत बनते रहे हैं शत्रु के बयान

बिहार में विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता शत्रुघन सिन्हा चुनाव प्रचार से खुद को दूर रखने के कारण पार्टी से काफी नाराज चल रहे थे। उनकी नाराजगी इस कदर थी कि महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्‍मीदवार नीतीश कुमार का खुलकर समर्थन करते हुए उन्हें सबसे अच्छा मुख्यमंत्री बता चुके थे।

कई बार तो वो इशारों इशारों में महागठबंधन की जीत की भविष्यवाणी भी करते दिखे। वहीं चुनावों के बीच में ही उन्होंने महंगी दाल का मुद्दा उठाकर अपनी पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी के ‌लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी थी जो पहले से ही इस मुद्दे को लेकर विरोधियों के निशाने पर थे।

इसके अलावा भी विभिन्न मुद्दों पर उन्होंने पार्टी से इतर रुख ही अपनाए रखा। ऐसे में संभावना जताई जा रही थी कि पार्टी चुनावों के बाद इसके लिए शत्रुघन पर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन सूत्रों की मानें तो फिलहाल उन्हें जीवनदान मिलता दिख रहा है।
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