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Bihar: जदयू ने प्रशांत किशोर पर भाजपा के लिए काम करने का लगाया आरोप, ललन सिंह ने पीके के दावे पर विरोध जताया

Tue, 04 Oct 2022 01:06 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, पटना।

सार

ललन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि बिहार के लोग जानते हैं कि नीतीश कुमार के शासन में राज्य में कितनी प्रगति हुई है। हमें प्रशांत किशोर से प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि किसी भी अन्य नागरिक की तरह वह मार्च या प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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जदयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने सोमवार को अपने पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पर 'भाजपा की ओर से' काम करने का आरोप लगाया और उनकी बहुप्रचारित 'जनसुराज' अभियान (Jan Suraaj campaign) के लिए धन के स्रोत को लेकर आश्चर्य जताया। जदयू के अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी प्रशांत किशोर की राज्यव्यापी 'पदयात्रा' की आलोचना की और नीतीश कुमार के सुशासन के दावे के एक दशक से भी अधिक समय के बावजूद बिहार के पिछड़ा रहने के उनके दावे के खिलाफ जोरदार विरोध जताया।

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ललन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि बिहार के लोग जानते हैं कि नीतीश कुमार के शासन में राज्य में कितनी प्रगति हुई है। हमें प्रशांत किशोर से प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि किसी भी अन्य नागरिक की तरह वह मार्च या प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किशोर अपने अभियान को चाहे जो भी नाम दें, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वह भाजपा की ओर से काम कर रहे हैं। वह जिस तरह के प्रचार के लिए पैसा खर्च कर रहे हैं, वह संदेह पैदा करता है।



ललन सिंह ने 'फुल पेज' विज्ञापन देने पर उठाया सवाल
ललन सिंह ने कहा कि कितनी बार हम देखते हैं कि अच्छी तरह से स्थापित राजनीतिक दल भी पूरे पृष्ठ के विज्ञापन देते हैं? उन्होंने कल (दो अक्तूबर) अपनी पद यात्रा के लिए ऐसा किया। आयकर विभाग, सीबीआई या ईडी इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं? इसका एकमात्र संभावित स्पष्टीकरण है कि वह केंद्र पर शासन करने वालों के समर्थन का आनंद ले रहे हैं।
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बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले प्रशांत किशोर ने हर तरह के राजनेताओं के साथ काम किया है और अब दावा किया है कि उन्होंने पेशेवर राजनीतिक परामर्श को छोड़ दिया है और अपने गृह राज्य को बदलने के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया है। हालांकि, उनके कदम को राज्य के यथार्थवादी राजनेताओं द्वारा संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है, जो आईपैक (IPAC) के संस्थापक को भाड़े के व्यक्ति के रूप में देखते हैं।

जदयू की यह टिप्पणी राज्य के भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद द्वारा जारी एक बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें किशोर को 'राजनीतिक बिचौलिया' कहा गया था, जिनकी नीतीश कुमार के साथ 'मौन सहमति' थी।

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