इधर, पत्र सार्वजनिक होने के बाद बुधवार को एडीजी जीएस गंगवार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कहा कि आरएसएस नेताओं पर खतरा था, इस वजह से जानकारी ली जा रही थी। वैसे इस पत्र की भाषा सही नहीं है। यह पत्र कैसे जारी हुआ, इसकी कोई जानकारी पुलिस विभाग, पुलिस मुख्यालय या सरकार को नहीं है।
पत्र की जांच की जा रही है और इस मामले में जांच के बाद संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। एडीजी ने कहा कि यह पत्र पुलिस अधीक्षक की तरफ से जारी हुआ है और जिन्होंने पत्र जारी किया, वो अधिकारी अभी पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग कर रहे हैं। उनका भी पक्ष लिया जाएगा।
पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ लेने से दो दिन पहले 28 मई को जारी हुआ था। खुफिया विभाग के इस पत्र में बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच के सभी अधिकारियों से आरएसएस, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद समेत विभिन्न संगंठनों के नेताओं की जानकारी मांगी गई थी।
इस पत्र में प्रदेश के आरएसएस पदाधिकारियों और सहायक संगठनों की विस्तृत जानकारी निकालने के आदेश दिए थे। इस पर एक सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा गया था। पत्र की कॉपी बिहार पुलिस के स्पेशल ब्रांच के एडीजी, आईजी और डीआईजी को भी भेजी गई थी।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि नीतीश ने पहले ही आरएसएस की जड़ें मजबूत कर दी हैं। आरएसएस को मजबूत करने में नीतीश की भूमिका है, अब जांच करवाकर क्या करेंगे? इसका जवाब सुशील मोदी और भाजपा वालों से लेना चाहिए, अब क्या वे क्या कहेंगे?