दीघा-पाटलिपुत्र इलाके में नीलेश मुखिया को अच्छा-बुरा कहने वाले लोग भरे हैं। कई तरह के आरोप भी लगते रहे हैं। लेकिन, सोमवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे जब पाटलिपुत्र इलाके में दफ्तर के पास ही नीलेश यादव उर्फ नीलेश मुखिया को दो बाइक पर सवार होकर आए चार में से एक अपराधी ने एक-एक कर छह गोलियां मार दीं तो माहौल बिगड़ने लगा। पाटलिपुत्र-दीघा इलाका पुलिस छावनी में बदल गया। आम मरीज को रुबन हॉस्पिटल टालमटोल भी कर देता, लेकिन हंगामे की आशंका से पूरा प्रबंधन युद्ध स्तर पर जुट गया। दिनभर ऑपरेशन चला। रात हो गई, क्योंकि एक गोली गले में फंसी थी। 30 घंटे गुजरने के बाद अब भी नीलेश को गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में रखा गया है। खतरे के 72 घंटे में से 30 घंटे गुजर गए हैं तो अब डॉक्टर भी ज्यादा उम्मीद जता रहे हैं। इधर, पुलिस भी अपनी जांच को प्राथमिकी के आधार पर आगे बढ़ा चुकी है।
इस अदावत की चर्चा पुलिस से पब्लिक तक
खुद मुखिया रहने के बाद पत्नी को वार्ड पार्षद बना चुके नीलेश यादव पर फायरिंग के बाद इलाके में सनसनी फैली हुई है। पुलिस हर कदम सोच-समझ कर उठा रही है। नीलेश के बड़े भाई सुरेश ने पुलिस को बयान दिया है कि यह घटना चुनावी रंजिश और बालू खनन की वजह से हुई है। उन्होंने कहा कि नीलेश ने दीघा के मखदुमपुर घाट के बालू खनन का ठेका लिया था। यह उनका नया काम था। इस काम में बतौर प्रतिद्वंद्वी पप्पू राय, धप्पू राय और गोरखा राय- तीनों भाई पहले से लगे हैं। नीलेश मुखिया अपने पार्टनर शिव गोप के साथ बालू खनन में उतरे थे। ये तीनों भाई नहीं चाहते थे कि नीलेश मुखिया भी बालू खनन के धंधे में शामिल होकर उनसे टकराए। तीनों भाइयों से नीलेश की अदावत वैसे भी पुरानी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 11 सितंबर 2017 को सोनपुर थाना क्षेत्र में कुर्जी गेट नंबर 68 निवासी वीरमणि को अपराधियों ने गोली से छलनी कर दिया था। सिंचाई विभाग के इंजीनियर वीरमणि नीलेश मुखिया के करीबी थी। इस घटना में उनके भाई मनोज के बयान पर पप्पू राय, धप्पू, विद्यासागर चौधरी, मुकेश कुमार, नीतीश कुमार और समीर कुमार को नामजद करते हुए मामला दर्ज कराया गया था।