सीबीआई की आठ सदस्यीय टीम ने शुक्रवार की देर शाम प्रधान डाकघर स्थित अधीक्षक कार्यालय के कार्यालय सहायक को गिरफ्तार कर लिया। हिरासत में लेते ही टीम उसे अपने साथ सर्किट हाउस ले गई, जहां पूछताछ करने के बाद उसे अपने साथ पटना ले गई। डाक घर में हुये अचानक छापेमारी से अफरातफरी का माहौल हो गया। मुख्य डाकघर स्थित सुपरिटेंडेंट कार्यालय के स्थापना विभाग के कार्यालय सहायक संजीत कुमार पर वेतन रिलीज करने के नाम पर पांच हजार रूपया रिश्वत मांगने का आरोप है।
अचानक शाम में धमक गई सीबीआई टीम
इस संबंध में अन्य कर्मचारियों का कहना है कि ग्रामीण डाक सेवक के वेतन का भुगतान डाक विभाग के स्थापना से होता है। कार्यालय सहायक संजीत कुमार के द्वारा 5 महीने के सैलरी भुगतान करवाने के लिए 10 हजार रूपये की मांग की गई थी। पीड़ित और आरोपी के द्वारा इस बात की सहमती बनी थी कि पांच हजार रुपए शुक्रवार को दिए जाएंगे और शेष राशि का भुगतान वेतन आने के बाद दिया जायेगा। पीड़ित ने इस बात की शिकायत सीबीआई से की थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई, जिसमें मामला सत्य पाया गया। इस संबंध में कर्मचारियों का कहना है कि प्रधान डाकघर मे शुक्रवार की शाम 6 बजे सादे लिबास में कुछ लोग आये और स्थापना के पोस्टल असिस्टेंट संजीत कुमार को पांच हजार घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस टीम का नेतृत्व पुलिस निरीक्षक प्रशांत कुमार ने किया। सीबीआई की टीम में पुलिस निरीक्षक प्रशांत कुमार सहित कुल 8 लोग शामिल थे।
हमेशा चर्चा में रहा है संजीत
सीबीआई की कार्रवाई के बाद डाक विभाग के कर्मियों के बीच भी कई तरह की चर्चा शुरू हो गई। लोग दबी जुबान से कह रहे थे कि लगभग नौ साल से अपनी पहुंच और पैरवी के बल पर कभी प्रधान डाकघर तो कभी डाक अधीक्षक कार्यालय में पदस्थापित रहा है। कुछ माह पूर्व हुए ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति में भी काफी चर्चित रहे थे। कई कर्मियों ने दबी जुबान से कहा कि जीडीएस के सफल अभ्यर्थियों को भी कागजात जांच के नाम पर काफी शोषण किया गया है। सीबीआई अब उन सभी मामलों की जांच करेगी।