भाकपा माले की पटना में अरसे बाद हो रही रैली। गांधी मैदान में दीपंकर समेत बाकी नेता।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की अरसे बाद हो रही रैली से पटना लाल झंडे से पट गया है। ऐतिहासिक गांधी मैदान में लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ रैली में जुटी भीड़ को देखकर राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य बुलंद हैं। उन्होंने कहा कि बिहार गरीबों का प्रदेश है और लोकतंत्र की जरूरत गरीबों को ही पड़ती है। ऐसे में बिहार की राजधानी पटना में जुटी यह भीड़ पूरे देश को संदेश दे रही है कि संविधान पर हमला करने वाली और नफरत की राजनीति करने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठ चुकी है। भाजपा अगर चुनाव के लिए हर समय तैयार रहती है तो वामपंथी दलों को भी रहना होगा। विपक्षी एकता के लिए वामपंथी दलों की कार्ययोजना इस तरह तैयार करनी होगी कि आगामी चुनाव में देश से नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंका जा सके। दीपंकर ने कहा कि रैली के बाद 16 से 20 जनवरी तक पटना में पार्टी का महाधिवेशन होगा, जिसमें विपक्षी और वामपंथी एकता के लिए बात कर कार्ययोजना तैयार की जाएगाी। देश को विभाजनकारी ताकतों से बचाने के लिए यह वक्त की जरूरत है।
रैली में लिए राजनीतिक प्रस्ताव
1. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को देश की सत्ता में बनाए रखने के लिए काॅरपोरेटों ने पहले पानी की तरह पैसा बहाया और फिर बदले में भाजपा एक के बाद एक नीतिगत बदलाव कर देश की कीमती प्राकृतिक संसाधनों सहित सार्वजनिक क्षेत्रों को उनके हवाले करती गई। इसी कारण 2014 में पूंजीपतियों की ग्लोबल लिस्ट में 609वें स्थान पर रहा अडानी ग्रुप भयानक धोखाधड़ी कर तीसरे स्थान पर पहुंच गया था। हिंडनबर्ग रिपवोर्ट के बाद अडानी के पतन के साथ आम शेयरधारकों की चिंता व उनकी जवाबदेही से बचते हुए नरेन्द्र मोदी ने चुप्पी साध रखी है। गांधी मैदान की यह रैली इस बात का उद्घोष है कि इस देश में अब मोदी-अडानी गठजोड़ नहीं चलेगा।
2. भाजपा-संघ शासन के समूचे तंत्र व संस्थाओं पर अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है। इस जकड़न से फासीवादी प्रवृत्ति लगातार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे फासीवाद को रोकना लोकतंत्र व देशभक्त नागरिकों की साझा चिंता का सबब बन गया है। बिहार की सत्ता से भाजपा की बेदखली एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन भाजपा-संघ जैसी ताकतों को राज-समाज दोनों जगह से बेदखल करना होगा। यह रैली फासीवादी गिरोहों को मुकम्मल तौर पर पीछे धकेलने तथा देश के संविधान में घोषित प्रतिबद्धताओं की रक्षा के लिए संघर्ष को तेज करने का संकल्प लेते हुए 2024 के आम चुनाव में देश की सत्ता से मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान करती है।
3. मोदी राज में ग्लोबल हंगर सूचकांक में भारत सबसे दयनीय देशों की सूची में शामिल हो गया है। महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज से सामूहिक आत्महत्याओं का सिलसिला चल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा घोर अराजकता व बदहाली की चरम अवस्था की ओर है। इनका जवाब देने की जगह मोदी सरकार के मंत्री और संघ-भाजपा के नेता सांप्रदायिक विभाजन की मुहिम चला रहे हैं। अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों का दमन कर रहे हैं। इस मुहिम की घोर निंदा करते हुए देश में आम जन के मुद्दों पर जनांदोलन तेज करने का इस रैली में आह्वान किया गया।