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2024 Election: तेजस्वी यादव की चाहत पर अब भी लालू यादव की नीति है भारी; शहाबुद्दीन परिवार की वापसी की वजह कौन?

सार

Bihar News : बाहुबली शहाबुद्दीन के इंतकाल के बाद का वक्त ऐसा था, जब तेजस्वी यादव राष्ट्रीय जनता दल में प्रभावी हो रहे थे। तेजस्वी ने पिता लालू प्रसाद से हटकर कुछ सोचने का प्रयास किया था। लेकिन, जब वह असफल लगे तो पिता ने कमान संभाली। असर सामने है।
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हिना-ओसामा शहाब की राजद में वापसी को बड़ा दिखाते हुए लालू प्रसाद यादव खुद आए सामने। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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  • भाजपा ने इस एंट्री पर कहा- बाहुबलियों के बगैर राजद का काम नहीं चल सकता
  • प्रशांत किशोर ने मुसलमानों को लक्ष्य भी बनाया, उप चुनाव में टिकट भी दे दिया
  • ओवैसी राजद का आधार वोट काट रहे, और कटने से बचाने को यह कदम उठाया
  • सीवान संसदीय सीट पर जदयू के बाद रहीं थी हिना, तीसरे नंबर पर राजद प्रत्याशी

दिवंगत बाहुबली सांसद मो. शहाबुद्दीन के परिवार को आखिर लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल में बुला लिया। क्यों हुआ ऐसा? यह समझने के लिए बहुत पीछे नहीं जाना है, इसी साल की राजनीतिक गतिविधियों के कारण यह परिणाम सामने आया है। मो. शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब और बेटे ओसामा शहाब की राजद में वापसी के बाद भाजपा ने साफ कहा कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी का काम बाहुबलियों के बगैर नहीं चल सकता है। तो, क्या सिर्फ यही कारण है। नहीं। सिर्फ यही नहीं। यह एक कारण कहा जा सकता है। लेकिन, उससे भी बड़ा कारण है प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री। इन दोनों कारणों के साथ एक और बात तय हो गई है कि तेजस्वी यादव की चाहत पर लालू प्रसाद यादव की नीति आज भी ज्यादा भारी है।

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प्रशांत किशोर ने कराई हिना-ओसामा की राजद में वापसी!
हिना शहाब और ओसामा शहाब अरसे से परेशान रहे हैं। शहाबुद्दीन के इंतकाल के बाद से ही। महागठबंधन सरकार थी, तब भी परेशान थे। उम्मीद थी, लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही थी। हिना कभी कहतीं कि राजद ही मेरा घर है तो कभी कह रही थीं कि हम सीवान की जनता के हिसाब से फैसला लेंगे। फैसला हुआ भी और वह राजद के खिलाफ। लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड ने सीवान से जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर रहीं हिना शहाब। लगभग एक लाख वोट से हारी थीं। और, हिना से लगभग एक लाख वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे राजद के अवध बिहारी चौधरी। लोकसभा चुनाव में राजद का यह हश्र हुआ, तब भी हिना शहाब की वापसी नहीं हुई। लेकिन, अब विधानसभा चुनाव 2025 से करीब एक साल पहले यह हो गया। क्योंकि, चार सीटों पर उप चुनाव में एक नई पार्टी उतरी है- जन सुराज। 

चुनावी रणनीतिकार से राजनीति में आए प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने राजद के आधार वोट पर 'M' यानी मुस्लिम को लक्ष्य बनाया और अब उप चुनाव में मुसलमान प्रत्याशी भी उतार दिया। असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM पहले ही राजद के आधार वोट में सेंध लगाती रही है, अब जन सुराज! ऐसे में यह मानना गलत नहीं कि पीके के कारण हिना-ओसामा की राजद में वापसी हुई है। मतलब, राजद को मुस्लिम यानी, M और यादव यानी Y के पुराने फॉर्मूले पर MY पर आने के लिए पीके ने मजबूर कर दिया।
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लालू प्रसाद यादव का प्रभाव तेजस्वी यादव से अब भी ज्यादा
झारखंड विधानसभा चुनाव में बालू माफिया और ईडी की गिरफ्त में बंद सुभाष यादव को प्रत्याशी बनाए जाने से लेकर हिना-ओसामा की वापसी तक एक और बात नजर आ रही- लालू प्रसाद यादव अब फिर से प्रभावी है। वैसे, 28 जनवरी 2024 के एक-दो दिन पहले से 12 फरवरी तक राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव वापस अपनी पार्टी के फैसलों में प्रभावी नजर आ रहे थे। लेकिन, थोड़ा अंदर-अंदर। जब महागठबंधन सरकार गिरने वाली थी तो जनता दल यूनाईटेड या भारतीय जनता पार्टी के विधायकों को साथ लाने की व्यूह-रचना में लालू प्रसाद सक्रिय थे। बाहरी तौर पर कमान तेजस्वी यादव के हाथ में नजर आ रही थी, लेकिन 'अमर उजाला' ने तभी दिखाया था कि लालू प्रसाद यादव दूसरे गणित में लगे हुए हैं।

28 जनवरी को बिहार की महागठबंधन सरकार के गिरने और 2020 के जनादेश की वापसी करते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनने के बाद 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट तक जो 'खेला' चला, उसकी जांच अब प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। लालू प्रसाद पिछले कुछ दिनों से रोज शाम ताजी हवा के लिए गंगा किनारे भी जा रहे हैं और अपने पुराने लोगों से मिल भी रहे हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारी तेजस्वी यादव से ज्यादा वह कर रहे हैं। तेजस्वी यादव की दूरी के बावजूद हिना-ओसामा की राजद में इस वापसी को भी उसी का प्रमाण माना जा सकता है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है, क्योंकि तेजस्वी यादव जब प्रभावी हुए थे तो उन्होंने 'दबंग' या 'बाहुबली' साउंड करने वाले चेहरों से खुद को दूर दिखाने की कोशिश की थी।

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