जमुई के लोगों ने दिवंगत दिग्विजय सिंह को याद किया।
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2009 में नीतीश और दिग्विजय सिंह की कटुता सामने आई
जदयू के जिला महासचिव राजेश कुमार ने बताया कि निशानेबाजी के शौकीन रहे दिग्विजय सिंह ने राजनीति में भी कई सटीक निशाने लगाए। इनका निशाना कुछ इतना सटीक होता था कि इनके प्रतिद्वंदी तिलमिला उठते थे। वर्ष 2009 में नीतीश और दिग्विजय सिंह की कटुता खुलकर सामने आ गई थी। भाजपा जिला महामंत्री बृजनंदन सिंह ने कहा कि दिग्विजय सिंह ऐसे व्यक्ति थे जो सभी के दिल में बसते थे। दिग्विजय सिंह बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। उस वक्त इस सीट पर नीतीश कुमार ने अपने कैंडिडेट को उतारा था, लेकिन दिग्विजय सिंह ने अपनी ताकत दिखाई और निर्दलीय ही चुनाव जीतकर बांका को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद 24 जून 2010 में लंदन में दिग्विजय सिंह का ब्रेन हेमरेज की वजह से उनके निधन के साथ ही बिहार की राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी पुतुल कुमारी राजनीतिक में अपनी कदम रखा और वह अपने पति की मृत्यु के बाद 2010 में उपचुनाव में बांका से लोकसभा के लिए चुनी गईं, हालांकि फिर 2019 में बांका से लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी भी हैं विधायक
बृजनंदन सिंह ने कहा कि श्रेयसी सिंह बिहार के दिग्गज नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं, जो 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई थीं। श्रेयसी ने भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद श्रेयसी ने जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। श्रेयसी सिंह ने भाजपा जॉइन करने के बाद भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें टिकट देकर अपना उमीदवार भी बनाया। इसके बाद भाजपा कैंडिडेट के रूप में श्रेयसी सिंह ने अपने डेब्यू सियासी पारी में शानदार जीत हासिल की है।
दिग्विजय सिंह उर्फ दादा की जीवन यात्रा
- 14 नवम्बर 1955 : गिद्धौर की धरती पर जन्म
- शिक्षा :- महाराज चन्द्रचूड़ विद्यामन्दिर गिद्धौर से प्रारंभिक शिक्षा, पटना यूनिवर्सिटी से स्नातक, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमफिल।
- 1979 :- डी. यू. छात्र संघ का चुनाव जीत राजनीति में हुए सक्रिय
- 1990 :- राज्यसभा पहुंचे
- 1991 :- चन्द्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री बने
- 1994 :- समता पार्ट का गठन
- 1998 :- बांका लोकसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की
- 1999 :- लोकसभा से निर्वाचित घोषित
- 2001/2002: राजनीतिक व प्रशासनिक क्षमता देखते हुए केंद्र में रेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद संभालने का मौका मिला
- वर्ष 2005 :- झारखंड राज्य सदस्य के रूप में चुने गए
- 2009:- बांका लोकसभा से निर्दलीय चुने गए, ऐतिहासिक रही जीत
- 24 जून 2010 : ब्रेन हेमरेज से निधन
इनपुट: जमुई से सेंटू कुमार