सहरसा पूर्णिया रेलखंड के सौर बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत खजूरी रेलवे ढ़ाला समपार फाटक संख्या 97 सी को रेलवे अधिकारी के द्वारा बंद करने के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने रेलवे अधिकारी और कर्मियों पर पथराव कर दिया। हालांकि इस पत्थरबाजी में कोई हताहत नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने रेलवे फाटक बंद करने में उपयोग हो रहे जेसीबी को आग के हवाले कर दिया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थिति ऐसी हो गई कि कुछ ही देर में वह इलाका पुलिस छावनी में तबदील हो गया।
रेलवे द्वारा खजूरी रेलवे ढ़ाला समपार फाटक संख्या 97 सी के पास अंडर पास का निर्माण किया गया है। इस वजह से रेलवे ने समपार फाटक संख्या 97 सी को बंद करने के निर्देश दिया है। रेलवे के विभागीय आदेश के बाद विभाग के अधिकारी और कर्मी वहां पहुंचे और अंडर पास निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। सब कुछ सामान्य ही था। इसी बीच ग्रामीणों ने कुछ महिलाएं को आगे कर पुआल के ढेर में आग लगा दी। आग लगाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान ग्रामीणों ने जेसीबी को भी आग के हवाले कर दिया।
इस संबंध में बनमनखी के आरपीएफ इंस्पेक्टर विजय शंकर ने बताया कि रेलवे द्वारा अंडर पास बनने के बाद समपार फाटक संख्या 97 सी को बंद करने का आदेश दिया गया था। जिसे बंद करने की कार्रवाई की जा रही थी। कुछ ग्रामीणों ने महिलाओं के द्वारा आगजनी कर दी गई। इसके बाद पत्थरबाजी भी की गई। एबीएन अग्रतर कार्रवाई की जा रही है। बैजनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित 97 सी रेलवे ढाला को बंद किए जाने के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। लगभग तीन घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन में दर्जनों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के ढाला को बंद कर दिया है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग के बंद होने से लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि रेलवे द्वारा बनाए गए अंडरपास में बरसात के दौरान पानी भर जाता है। लोगो ने कहा कि जलजमाव की वजह से न केवल वाहनों का आवागमन बाधित होता है, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी यह मार्ग दुर्गम हो जाता है।