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Bihar News : शिक्षक ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, मांगी परिवार के लिए इच्छा मृत्यु; वजह भी बताई

Sat, 22 Feb 2025 10:55 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर

सार

Bihar : कहते हैं जिंदगी बहुत खुबसूरत है, लेकिन जो जिंदगी बोझ बन जाय तो इस स्थिति में लोग ख़ुदकुशी कर लेते हैं। बिहार के एक शहर में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक ने पीएम को पत्र लिखकर पूरे परिवार के लिए इच्छा मृत्यु की मांग की है।
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शिक्षक का पूरा परिवार - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को भागलपुर आ रहे हैं, लेकिन इससे पहले एक शिक्षक ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने परिवार के लिए इच्छा मृत्यु की मांग की है। मामला  नवगछिया प्रखंड के कदवा गांव की है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा पत्र 
कदवा गांव निवासी घनश्याम कुमार ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बीते 19 फरवरी को पत्र लिखकर अपने दो मासूम पुत्रों के समुचित इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगायी है। उनके पुत्र अभिनव अमन (15) और अनुराग आनंद (10) ड्यूशेन मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी (DMD) नामक दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। दोनों बच्चे व्हीलचेयर पर ही अपनी जिंदगी जी रहे हैं। इनका जीवन का एक-एक मिनट अत्यंत कष्टों के बीच बीत रहा है। मांसपेशियों के कमजोर होने से ये बच्चे शारीरिक रुप से कुछ नही कर पाते हैं। दोनों पुत्रों की कष्टप्रद स्थिति को देखकर परिवार के लोग बेहद दुखी हैं। परिजन का कहना है कि अगर दवा एवं ईलाज की  सुविधा नहीं मिलती है तो ऐसी विकट स्थिति मे परिवार के सभी सदस्य सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग करता हूं।

क्या लिखा है पत्र में 
घनश्याम कुमार ने पत्र में लिखा है कि यदि उनके बच्चों को समय पर सही इलाज नहीं मिला, तो उनकी जिंदगी बचाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार से अपील की है कि रेयर डिजीज फंड के तहत उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए, जिससे उनके बच्चों को जीवनरक्षक दवा मिल सके और उनकी जिंदगी बचाई जा सके। यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे अनेक बच्चों की पीड़ा को दर्शाता है। जरूरतमंद परिवार की उम्मीदें प्रधानमंत्री के फैसले पर टिकी हैं।
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कैसी है परेशानी 
घनश्याम कुमार ने बताया कि उनके बच्चों को फ्रेम पॉइंट म्यूटेशन EXON 12 & 40 की समस्या है, जिसके उपचार हेतु PTC Translara (Ataluren) नामक दवा आवश्यक है। यह दवा अमेरिका में FDA द्वारा 2014 में अनुमोदित की जा चुकी है और वर्तमान में 33 देशों में उपलब्ध है। भारत में 2017 में इस दवा का ट्रायल हुआ था, लेकिन अत्यधिक महंगी होने के कारण यह आम जनता की पहुंच से बाहर है। परिवार ने दिल्ली के एम्स में भी इलाज की संभावना तलाशी, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि यदि स्वास्थ्य विभाग से आर्थिक सहायता मिलती है तो दवा उपलब्ध कराई जा सकती है। लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिल पाई है, जिससे बच्चों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।

बच्चों में डीएमडी आनुवांशिक होता 
डयूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) एक गंभीर आनुवंशिक रोग है, जो डिस्ट्रोफिन प्रोटीन बनाने वाले जीन में बदलाव (म्यूटेशन) के कारण होता है। डिस्ट्रोफिन मांसपेशियों की कोशिकाओं को स्थिर रखने और उनकी रक्षा करने में मदद करता है। इसकी कमी से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और धीरे-धीरे उनका क्षय होने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डीएमडी से प्रभावित बच्चों के शरीर में यह प्रोटीन बहुत कम या बिल्कुल नहीं बनता, जिससे उनकी मांसपेशियां सिकुड़ने और कमजोर होने लगती हैं। और शारीरिक रूप से कमजोर होने से ये बच्चे चल नहीं पाते हैं।

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