कला का प्रदर्शन करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
दूसरी विधा में 'कर्नाटक लाइट क्लासिकल वोकल' था, जिसमें सात प्रतिभागी थे। इसके लिए पांच मिनट का समय निर्धारित था। इस विधा में भी एक पर एक प्रस्तुति सुनने और देखने को मिली। ज्यादातर प्रस्तुति में देवी-देवताओं का बखान अलग-अलग स्वरूपों में प्रस्तुत किया गया।
तीसरी विधा में 'फोक सॉंग सोलो' था, जिसमें 20 प्रतिभागी थे। इस प्रतियोगिता में भी पांच मिनट का समय निर्धारण था। इस प्रस्तुति में सामाजिक संघर्ष, सामुहिक महत्वाकांक्षा, स्थानीय लड़ाई, ऐतिहासिक घटनाक्रम और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को बहुत ही अनोखे अंदाज में फोक गानों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। दिल्ली की गरिमा ने फोक सॉंग के माध्यम से असहयोग आंदोलन में स्त्रियों की सहभागिता कैसे थी, इसको काफी ही बढ़िया तरीके से प्रस्तुति की गई।
कला का प्रदर्शन करती महिला कलाकार
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चौथी और अंतिम विधा में 'फोक सॉंग ग्रुप' था, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों के कुल 17 ग्रुप ने भाग लिया। अलग-अलग राज्यों के स्थानीय परिधान और वेशभूषा से अलंकृत कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति दी। एक साथ वेशभूषा, गान, और क्षेत्रीय अनुभूति से जुड़े शब्द का स्वाद दर्शकों ने उठाया। तालियों की गड़गड़ाहट में कार्यक्रम की सफलता साफ परिलक्षित था।
संयोजक सांस्कृतिक गतिविधि सीसीएससीएसबी के डीओपीटी प्रदीप कुमार खन्ना ने बताया कि पूरा कार्यक्रम अपनी तय लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। जैसी अवधारणा थी ठीक उसी दिशा में कार्यक्रम का आयोजन सफलता पूर्वक किया जा रहा है। किसी प्रतिभागी को कोई दिक्कत न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा हैं। खाने-पीने से लेकर हर व्यवस्था चाक-चौबंद है। स्थानीय सहयोग भी पूरी तरह से मिल रही है। बाहर से लोग आकर यहाँ बहुत खुश हैं और उन्हें एक नई अनुभूति यहाँ आने के बाद प्राप्त हो रहा है। आशा है आने वाले दिनों में भी कार्यक्रम अपने पूरे शबाब के साथ आगे बढ़ेगा।