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Bihar : लालू परिवार के विरोधी रहे विशुनदेव राय को श्रद्धांजलि देने पहुंचे तेजस्वी यादव, कहा राजद की बड़ी क्षति

Fri, 10 Jan 2025 11:53 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, वैशाली

सार

Bihar : उत्तर बिहार में विशुनदेव राय को यादव का नेता माना जाता था। लालू प्रसाद यादव अपने आवास पर बुलाकर उनको राजद की सदस्यता दिलावाई और फिर विधान परिषद तक पहुंचाया।
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विशुनदेव राय को अंतिम श्रद्धांजलि देते तेजस्वी यादव। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव हाजीपुर पहुंचे और पूर्व एमएलसी विशुनदेव राय को अंतिम श्रद्धांजलि दी। विशुनदेव राय का पार्थिव शरीर राजद नेता मुकेश रोशन की आवास पर रखा गया था। विशुनदेव राय की हृदय गति रुक जाने से उनका निधन हो गया था।

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भावुक हुए तेजस्वी यादव
एमएलसी विशुनदेव राय को श्रद्धांजलि देने के दौरान तेजस्वी यादव भावुक हो गए। तेजस्वी यादव ने कहा कि विशुनदेव राय के निधन से राजद को एक बड़ी क्षति हुई है और इसे कोई पूरा नहीं की कर सकता है। उन्होंने कहा कि विशुनदेव राय एक बड़े समाजवादी नेता थे। एक ऐसा भी समय था जब लालू परिवार के वह घोर विरोधी हुआ करते थे। बाद में लालू प्रसाद यादव उन्हें पटना आवास पर बुलाकर राष्ट्रीय जनता दल की सदस्यता दिलवाई और एमएलसी बनाया।

यादव का नेता माने जाते थे 
राजद नेता और उनके भतीजे मुकेश रोशन ने बताया कि उनके चाचा विशुनदेव राय लंबे समय से बिशनदेव राय बीमार चल रहे थे। विशुनदेव राय लालू प्रसाद यादव के पारंपरिक सीट रहे राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते थे और लालू प्रसाद यादव को कड़ी टक्कर दिया करते थे। लालू प्रसाद यादव 2000 में अपने आवास पर बुलाकर विशुनदेव राय को विधान परिषद भेजा था। सन 1985 में जब बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर हुआ करते थे तो विशुनदेव राय को कई देशों में प्रतिनिधि बनकर भेजा था। विशुनदेव राय 1988 में राजनीति में कदम रखा था वैशाली जिला में भी यादवों का नेता विशुनदेव राय माने जाते थे। विशुनदेव राय के भतीजा मुकेश रोशन वर्तमान में महुआ से विधायक हैं। वहीं लालू परिवार काफी खास विशुनदेव राय का पूरा परिवार खास माना जाता है। कहा जाता है कि लालू प्रसाद यादव की  जिस समय बिहार में सरकार हुआ करती थी उस समय विशुनदेव राय लालू प्रसाद यादव के परिवार के घोर विरोधी माने जाते थे। वह उस समय उत्तर बिहार में यादवों के नेता माने जाते थे। यही वजह थी कि लालू प्रसाद यादव ने उनको बुलाकर राजद पार्टी में शामिल कराया और एमएलसी चुनाव लड़ाया और विधान परिषद भेजा। यही वजह है कि लालू प्रसाद यादव के परंपरागत सीट राघोपुर पर दूसरा कोई दावेदार नहीं हुआ।

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