क्या बिहार में जान की कीमत सिर्फ 1 लाख रुपए है? यह सुनकर कुछ अजीब जरुर लग रहा है, लेकिन यह बात सच साबित होते दिखी। मामला वैशाली जिले का है, जहां हाजीपुर के नगर थाना क्षेत्र के यादव चौक स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज के मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के डाक्टर ने इलाज में लापरवाही की, जिस वजह से मरीज की मौत हो गई। मरीज के भर्ती रहने के दौरान डाक्टर के द्वारा समुचित इलाज नहीं किया गया। मुंह एवं शौच के रास्ते से रक्त स्राव होने लगा। डॉक्टर को बुलाने पर भी डॉक्टर नहीं आए। परिजनों ने कहा कि इलाज में लापरवाही बरतने की वजह से मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत फुलहारा बाजार निवासी नेवा लाल पासवान के पुत्र प्रेम पासवान के रूप में की गई है।
घटना के संबंध में परिजनों का कहना है कि प्रेम पासवान का 19 जनवरी को पैर टूट गया था। परिजन उसे इलाज के लिए यादव चौक स्थित चांदपुर हाउस में संचालित निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन कर पैर में स्टील लगाने की बात कह कर रुपया जमा करने के लिए कहा। रुपया जमा करने के बाद ऑपरेशन भी हो गया। लेकिन ऑपरेशन होने के बाद अचानक मरीज के मुंह और शौच के रास्ते से रक्त स्राव होने लगा। मरीज के अचानक तबीयत खराब होने के बाद परिवार वालों ने डॉक्टर को बुलाया। लेकिन डॉक्टर ने समुचित इलाज नहीं किया। मरीज की हालत खराब होती चली गई। तब डॉक्टर ने रेफर कर दिया गया।
फिर परिजन मरीज को जौहरी बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में ले गये, जहां डाक्टर ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। परिजन शव लेकर वापस यादव चौक स्थित अस्पताल आ गये और वहां जमकर हंगामा करने लगे। हंगामा को देखते हुए अस्पताल संचालक ने परिजन को दो चेक देकर मामले को शांत कराया। चेक यूनियन बैंक का था। दोनों चेक पर 50 हजार 50 हजार का अमाउंट भरा हुआ था। अस्पताल संचालक ने जबरन दबाव बनाकर चेक सौंपे जाने के बाद पूरे मामले को शांत कराया। इस संबंध में नगर थाना अध्यक्ष सुनील कुमार का कहना है कि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत की सूचना उन्हें नहीं मिली है।