श्रीगुरु पूर्णिमा उत्सव का उद्घाटन करते अतिथिगण
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“2017 में सिमरिया धाम में ऐतिहासिक पूर्ण कुंभ मेला लगा था। अब यहां आधुनिक साज-सुविधा के साथ नए घाट बनेंगे तो प्रयागराज की तरह यहां का पूर्ण कुंभ भी विख्यात हो जाएगा।" बेगूसराय में गंगा तट पर सिमरिया धाम में तीन दिनों से चल रहे श्रीगुरु पूर्णिमा उत्सव की अध्यक्षता करते हुए अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने यह संभावना व्यक्त की।
संस्कृति और परंपरा का अमृत पर्व है कुंभ
रविवार को कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, मुख्य अतिथि 'अमर उजाला' के संपादक उदय कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि नीलमणि सिन्हा, लोकसभा टीवी के संपादक श्याम किशोर सिन्हा, डॉ. शारदेन्दु झा, डॉ. जनार्दन चौधरी, चन्द्रशेखर और उषा रानी ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कुंभ को राष्ट्र की एकता और समग्रता का पर्याय बताया। डॉ. मिश्र ने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति और परंपरा का अमृत पर्व है। हमें सिमरिया धाम के पूज्य स्वामी चिदात्मनजी के प्रति आभारी होना चाहिए कि उन्होंने प्रचलित चार कुंभों की जगह बारह राशियों के आधार पर द्वादश कुंभ की पुन: स्थापना की।उन्होंने कहा कि सिमरिया धाम के आदिकुंभ और भारत के विभिन्न स्थलों पर द्वादश कुंभ आयोजित करने की प्रेरणा पूज्य स्वामी चिदात्मनजी ने दी। सिमरिया धाम में 2017 में ऐतिहासिक पूर्ण कुंभ लगा था, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नैतिक समर्थन दिया था।
राष्ट्रीय स्तर पर सिमरिया कुंभ की पहचान बनेगी
मुख्य अतिथि उदय कुमार सिन्हा ने कहा कि सिमरिया में पक्के घाट बन जाने के बाद यहां पूर्ण कुंभ के राष्ट्रीय स्तर पर पहचान का रास्ता खुल जाएगा। गंगा के घाटों को नई साज-सुविधा के साथ तैयार किया जाएगा तो उसके बाद लगने वाला कुंभ प्रयागराज की भांति ही व्यापक होगा। कुंभ भारत की संस्कृति और समावेशी प्रवृत्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बादशाह अकबर ने कुंभ के विराट रूप को देखकर ही प्रयागराज में शाही स्नान शुरू कराया था।
देश और धर्म के विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा
स्वामी चिदात्मनजी महाराज के सानिध्य में आयोजित संगोष्ठी के दौरान धर्म और भारत से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई। राष्ट्रहित में कुंभ का महत्व, भारत, भारतीय एवं भारतीयता, संस्कृत, संस्कृति एवं संस्कार, गुरु पूर्णिमा का महत्व और सर्वमंगला शास्त्र, राष्ट्र एवं समिति के रूप में महत्व विषयों पर चर्चा के जरिए विद्वानों ने प्रासंगिक तथ्यों के साथ जानकारी दी।