शब्दों से खेलते हैं साहित्यकार। शब्दों से ही खेलना सिखाते भी है। कभी-कभी एक मुलाकात काफी होती है। लेकिन, यहां शब्दों से खेलना सिखाने के लिए पटना में पहली बार एक 'साहित्यिक निवास कार्यक्रम' रखा गया था।प्रेमचंदकालीन लेखक राजा राधिकरमण प्रसाद सिंह ने हिंदी साहित्य की जिस महत्वपूर्ण पत्रिका 'नई धारा' को शुरू किया था, उसके प्रकाशन के 75 वर्ष होने पर हिंदी भाषा में शुरू हुई यह पहली राइटर्स रेजिडेंसी (Writers residency) विवादों में आ गई है। देशभर के साहित्यकार पटना और इसमें हुए कथित कांड पर बातें कर रहे हैं। 'अमर उजाला' ने उसकी तह तक जाकर समझा और हर पक्ष को सामने ला रहा है।
राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह (1890-1971) साहित्य और बिहार की दृष्टि से बेहद प्रतिष्ठित नाम आज भी हैं। उन्हीं के संरक्षण में नई धारा पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ था। पत्रिका के 75 वर्ष पूरा होने पर पटना में उनके सूर्पुयूरा हाउस में राइटर्स रेजिडेंसी रखा गया। छह हफ्ते के इस निवास कार्यक्रम की जानकारी खुद इसके लिए चयनित किए गए वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कल्पित ने भी सोशल मीडिया के जरिए दी थी कि इस दौरान चयनित लेखक अपनी अधूरी पांडुलिपि पूर्ण कर सकते हैं। जहां तक हंगामे की बात है तो जयपुर में रहने वाले कृष्ण कल्पित लंबे समय तक पहले पटना में रहे हैं और इस बार जब वह एक नई भूमिका में आए तो सबकुछ ठीक होते-होते एक हंगामा मच गया। आरोप है कि वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कल्पित ने अपने संरक्षण में साहित्यिक गतिविधि के लिए दिल्ली से आई युवा रचनाकार के सामने अमर्यादित मांग रख दी। बताया गया कि सूर्यपुरा हाउस के केयटेकर्स के सामने युवा महिला रचनाकार ने आरोप लगाया कि कृष्ण कल्पित ने न केवल अनुचित मांग रखी, बल्कि यह तक कहा कि इसी के सहारे कई महिला रचनाकारों को उन्होंने खड़ा किया है।
महिला रचनाकार की शिकायत थाने में नहीं
लोग आरोप लगाने वाली महिला रचनाकार का नाम जानना चाह रहे और कुछ तो उनकी तस्वीर-नाम जाहिर कर रहे, लेकिन पत्रकारिता के उच्च मापदंडों का अनुपालन करते हुए 'अमर उजाला' यह जानकारी सामने नहीं ला रहा है। चूंकि आरोप के तत्काल बाद कृष्ण कल्पित पटना से जयपुर रवाना हो गए और कथित तौर पर साहित्यकारों के एक खेमे ने कुछ घटित नहीं होने के आधार पर मामले को थाने तक नहीं जाने दिया, इसलिए पुलिस की भूमिका नहीं आई।