तट पर सैलानियों के स्वागत में फूल लिए खड़ी थीं छात्राएं।
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पहले से थी पूरी तैयारी, अफवाह से परेशानी
चिरांद में जहां तट से पहले कम पानी के कारण क्रूज अटका, वहां छोटे जहाजों की व्यवस्था रखी गई थी। क्रूज के मुताबिक पानी होगा या नहीं, इसी अनुमान को देखते हुए जहाज तैनात थे। जब क्रूज उस जगह को पार नहीं कर सका तो करीब 800 मीटर दूर छोटे जहाज भेजकर सैलानियों को उसके जरिए तट तक लाया गया। इस बीच अफवाह के कारण थोड़ी अफरातफरी जरूर रही, लेकिन सैलानियों के स्वागत की तैयारी में फूल-माला लेकर खड़े लोग और ढोल-बाजा वाले परेशान नहीं हुए।
सैलानियों ने ढोल-बाजे से स्वागत करने वालों के साथ भी तस्वीरें लीं।
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स्वागत के साथ चिरांद के स्थलों को देखने गए सैलानी
जैसे ही छोटा जहाज देशी-विदेशी सैलानियों को लेकर उतरा, फूलों की वर्षा कर सभी सैलानियों का स्वागत हुआ। ढोल-बाजे के बीच अधिकारियों ने बुके देर सैलानियों का स्वागत किया। बाद में सैलानी चिरांद के पुरातात्विक स्थलों केा देखने के लिए पैदल निकले। विदेशी सैलानियों ने गांव वालों के साथ यादगार तस्वीरें भी लीं। इस दरम्यान हजारों की संख्या में स्थानीय लोग मोबाइल से इस पल के साक्ष्य को कैमरे में कैद करते नजर आए।
बिहार में तट के आसपास इस तरह के क्रूज को परेशानी
इतने बड़े क्रूज के हिसाब से बिहार में गंगा के सभी तटों पर पानी की गहराई नहीं है। राजधानी पटना में भी गंगा के ज्यादातर घाटों पर यही हालत है। गंगा से गाद हटाने के लिए कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहल कर चुके हैं। गंगा को पटना के करीब लाने के नाम पर गाद हटाने के लिए करोड़ों खर्च के बावजूद बाढ़ का समय छोड़ दे तो चैनल के जरिए ही गंगा अमूमन पटना के तट के आसपास रहती है। इसी तरह भागलपुर में कुछ दिन पहले बरारी घाट पर गाद हटाने के लिए मजदूर लगाए गए थे, क्योंकि इसके कारण पेयजल संबंधित भी परेशानी हो रही थी।