फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar News : गंभीर बीमारियों से बचाएगा मोटा और छोटा अनाज, मिलेट मैन ने बताया ऐसे बचेगी जिंदगी

Mon, 25 Nov 2024 03:49 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar : पिछले 80 साल से हमारा खानपान रासायनिक गोबर और कीटनाशक दवाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग करके अनाज को उगा रहे हैं। इस तरह के उत्पादन से उपजे अनाज को खाकर हम डायबिटीज, बीपी, थायराइड और कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों का खुले हाथों से स्वागत कर रहे हैं।
विज्ञापन
डॉ खादर वली। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

डॉक्टरों का कहना है कि आज खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण कम उम्र के लोगों खासकर बच्चा, युवती और युवक गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। खानपान में नमक, चीनी और कीटनाशक युक्त अनाज के कारण डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हृदय की बिमारी और कैंसर जैसी घातक बीमारियां काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में हमें जरूरत है पुराने खानपान को अपनाने की, जिसके बल पर न सिर्फ हम उन बीमारियों को अपने से दूर रख सकते हैं बल्कि बीमार होने के बाद खुद को उन बीमारियों को ठीक भी कर सकते हैं। यह कहना है डॉ खादर वली का।

विज्ञापन



कौन हैं डॉ खादर वली 
डॉ खादर वली को भारत का मिलेट मैन भी कहा जाता है। मोटा दाना खासकर बाजरे को बढ़ावा देने और मोटे अनाज को लेकर वह लगातार कई वर्षों से काम कर रहे हैं। उन्हें इनके इन कार्यों की वजह से पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। मूल रूप से वह आंध्र प्रदेश के कडप्पा ज़िले के रहने वाले हैं। उन्होंने लगभग तीन दशकों से ज़्यादा समय से बाजरा पर शोध किया है। उनका दावा है कि अगर कोई भी शख्स अपने भोजन में बाजरा को शामिल कर ले, तो उसे पूरी जिंदगी में कभी दवा की कोई ज़रूरत नहीं पड़ेगी यानी बाजरा यानी मिलेट खाने वाला व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ेगा।

जानिए क्या है मोटा अनाज 
डॉ खादर वली का कहना है कि मिलेट यानी मोटे अनाज में बाजरा, मधुआ, चेना, जोअर, कुटकी, कन्नी,सांवा, हरा सांवा, कोदो, रागी, जुआर, कांगनी वगैरह शामिल हैं। मिलेट्स में प्रोटीन विटामिन, आयरन, मिनरल्स और फ़ाइबर, जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसने सेवन करने से शरीर की बीमारियां दूर हो जाती हैं।
विज्ञापन


जहरीला खाना खाकर हम खुद बीमारियों को बुला रहे हैं 
डॉ खादर वली ने बताया कि पिछले 80 साल से हमारे खान-पान पारिश्रमिक विधान में रासायनिक गोबर और कीटनाशक दवाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग करके अनाज को उगा रहे हैं। इस तरह के उत्पादन से उपजे अनाजों को खाकर हम डायबिटीज, बीपी, थायराइड और सबसे बड़ी बीमारी कैंसर का खुले हाथों से हम स्वागत कर रहे हैं। इन अनाजों को खाने का दुष्परिणाम यह हुआ कि छोटे-छोटे बच्चों में यानी दस साल के अंदर के बच्चोँ में भी ब्लड कैंसर, बोन कैंसर गंभीर बीमारियां दिखने लगी हैं। यह बीमारियां गलत तरह के खान-पान के वजह से ही हो रही हैं, फिर भी लोग समझ नहीं रहे हैं। लोग सोच रहे हैं कि बीमारियां कैसे हो रही हैं। लोग यह नहीं समझ रहे हैं कि हम जो जहर वाला खाना जब तक खाते  रहेंगे तब तक यह बीमारियां आती रहेंगी। इसलिए अगर आपको स्वस्थ रहना है तो हमें अपने जैविक कृषि यानी मिलेट्स जो हमारा पारंपरिक दाना था, उस ओर वापस लौटना होगा।

कैसे और कहां कर सकते हैं खेती
 डॉ खादर वली ने बताया कि मिलेट्स हम कहीं भी उपजा सकते हैं। इसके लिए बहुत कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं है। इसमें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। खाद की जरूरत नहीं है, क्रीमी, किट और अन्य किसी भी दवाओं की कोई जरूरत नहीं है। सरकार को एक नीति बनानी होगी जिसके तहत हर गांव में उगने वाले अनाज पर ध्यान देना होगा। सरकार क़ृषि विभाग के जरिए किसान तक यह बात पहुंचाए कि आपके गांव में बिना पानी और बिना खाद का इस्तेमाल किये हुए मिलेट्स को उपजाया जा सकता है। डॉ खादर वली ने बताया कि यह अनाज हर जगह उपजाया जा सकता है। डॉ खादर वली ने बताया कि 10 सेंटीमीटर बारिश होने वाले हर  जगह पर यह अनाज उपजाया जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि यह अनाज गुजरात और राजस्थान में भी उपजाया जा सकता है। क्योंकि यही हमारा सही भोजन है। हम लोग गेहूं और चावल के चक्कर में पुराने अनाज को भूल चुके हैं। ऐसे में सरकार को पहल करनी चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मिलेट्स और उसके उपयोग को समझ सकें।

चावल और गेहूं को छोड़ मिलेट्स अपनाईये 
डॉ खादर वली ने कहा कि मैं पिछले 30 सालों से यही काम हर गांव हर जगह जाकर कर रहा हूं। मैं लोगों से ही कहता हूं कि चावल और गेहूं को खाना छोड़ दीजिए और मिलेट्स को खाना शुरू कर दीजिए ताकि आप अपने आपको स्वस्थ रख सके। इसको खाने के बाद हमें दवाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ खादर वली ने कहा कि किसानों को समझाने की जिम्मेदारी एक्सपर्ट की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में खेती के दौरान हर एकड़ में तीन सौ किलो खाद का उपयोग हो रहा है। पूरे भारत में 200 किलो प्रति एकड़ खाद का उपयोग हो रहा है। इतना जहर हमारे अनाज में आ रहा है। इस तरह यह सारी बीमारियां हमारे खानपान से ही हो रही हैं।

Trending Videos
विज्ञापन

पूर्व सांसद आर के सिन्हा - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने कहा मैं हूं इसका उदाहरण
 मिलेट्स खाकर लोग बीमारी को दूर भगा सकते हैं। इस बात में कितनी सच्चाई है यह जानने के लिए अमर उजाला ने पूर्व सांसद आर के सिन्हा से भी बात की। उन्होंने बताया कि 1975 में इमरजेंसी के समय भूमिगत कार्य करने के कारण खाने-पीने का कोई हिसाब रहता नहीं था। दिन-रात इधर-उधर भागना पड़ता था। देर रात जागना भी पड़ता था। भूखे भी रहना पड़ता था। इस कारण मुझे डायबिटीज हो गया। फिर ब्लड प्रेशर हो गया। फिर आंख में भी दिक्कत होने लगी। मोतियाबिंद भी हो गया। दिल की बीमारी नहीं हुई लेकिन बाकी अनेक तरह की कई बीमारियों से मैं ग्रसित हो गया। डॉक्टर से दिखाने पर कई तरह की दवा देते थे। अलग-अलग तरह की ढेर सारी दवा खाने के कारण और भी कुछ-कुछ होने लगा। इसका नतीजा यह हुआ कि मुझे दो बार किडनी को प्रत्यारोपण कराना पड़ा। अब मैं मिलेट का ही भोजन करता हूं और यह जानकर आपको हैरानी होगी कि अब मैं पूर्ण रूपेण स्वस्थ हूं। आप इस बात का अंदाजा इस बात से लगाइए कि मुझे 50 यूनिट इंसुलिन लेता होता था। यह सर्वाधिक डोज है, जिसके बाद अब किसी मरीज को इससे अधिक दिया नहीं जा सकता है। मिलेट खाने के बाद अब मुझे उसकी जरूरत ही नहीं पड़ती है। इसलिए आज के समय में मिलेट्स का इतना प्रभाव हमें दिख रहा है कि हम हर किसी से यह कह सकते हैं कि अगर आप मिलेट्स को खाते हैं  तो कई तरह की गंभीर बिमारियों और उससे होने वाली परेशानियों से आप निजात पा सकते हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें