लालू यादव, तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
तेज प्रताप यादव को राष्ट्रीय जनता दल से निलंबित किया गया। यह अभी की बड़ी राजनीतिक खबर है। लेकिन, इस घटनाक्रम की शुरुआत तभी हो गई थी, जब बड़े तेज प्रताप यादव को छोटा पद देकर छोटे तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बड़ा बना दिया था। बिहार विधानसभा चुनाव इसी साल होने वाला नहीं रहता तो शायद तेज प्रताप यादव बच भी जाते। किनारे ही सही, वहीं रहते। लेकिन, चुनावी साल में तेजस्वी यादव के कद पर तेज प्रताप यादव की छवि से पड़ने वाले असर को देखते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कार्रवाई के मौके पहले भी आए थे, लेकिन इस बार सीधा एक्शन हुआ। वह भी एक फोटो वायरल होने के नाम पर। इसमें भी कोई तेज प्रताप आपत्तिजनक हालत में नहीं दिखे थे। छवि इसलिए बिगड़ रही थी, क्योंकि तेज प्रताप के तलाक का मामला कोर्ट में है।
फायदा या नुकसान का गणित भी समझें
शनिवार को तेज प्रताप यादव का एक युवती के साथ फोटो सामने आया था। यह तेज प्रताप यादव के सोशल मीडिया से ही जारी हुआ था। दो जगह से यह कुछ देर बाद डिलीट भी हुआ, लेकिन एक जगह दिखता रहा। 'अमर उजाला' ने युवती की मर्यादा का ख्याल रखते हुए उसकी पहचान उजागर नहीं की। मामला बढ़ता ही गया। अब राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उन्हें मर्यादा तोड़ने का दोषी मानकर पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया। तेजस्वी यादव ने भी कह दिया कि राजद अध्यक्ष ने मर्यादा को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है और वह इस फैसले को सही मानते हैं। दूसरी तरफ, इस फैसले के फायदे-नुकसान को देखें तो बिहार चुनाव साफ-साफ नजर आता है। तेज प्रताप यादव पर की गई इस कार्रवाई को जिस तरह से तेजस्वी ने कहा कि मुझे न यह सब अच्छा लगता है और न बर्दाश्त करते हैं, उससे साफ पता चलता है कि बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर तेजस्वी यादव अपनी राह में किसी को नहीं आने देना चाहते। तेज प्रताप का यह फोटो तेजस्वी यादव की राह में रोड़ा जरूर बनता।