माता के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़।
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आदिकाल से स्थापित है मंदिर
पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक भगवान शिव जब सती की जला शरीर लेकर क्रोध में तीनों लोको का भ्रमण कर रहे थे। उसी समय भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए थे। उसी समय माता सती का स्तन गया के भस्मकुट पर्वत पर गिरा था। उसी दौरान यह स्थान पालन पीठ के रूप में विराजमान है। मां मंगलागौरी मंदिर के गर्भगृह में प्राचीन काल से अखंड ज्योति जल रहा है। यही कारण है कि माता सती के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है।