वक्फ संशोधन बिल को समर्थन देने बाद जनता दल यूनाईटेड के मुस्लिम नेता नाराज होकर पार्टी छोड़ रहे हैं। इस घटना ने सियासी गलियारी में हड़कंप मच दिया है। जदयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के सदस्यों ने प्रेस कांफ्रेंस किया। जदयू की प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभ और राज्यसभा में जनता दल (यूनाइटेड) के महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल करने के बाद पारित हुआ। हैरानी की बात है कि राजद ने वक्फ संशोधन बिल पर जेपीसी को कोई सुझाव दिया ही नहीं। वक्फ संशोधन बिल आने से बहुत पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वक्फ की चिन्ता की और बिहार में वक्फ विकास बोर्ड की स्थापना की। इसके तहत 110 करोड़ का वित्तीय आवंटन किया गया, जिससे अल्पसंख्यक छात्रावास, विवाह भवन, मल्टी पर्पस बिल्डिंग आदि का निर्माण संभव हुआ। वक्फ की सम्पत्ति के विकास का नज़ीर देखना हो तो पटना के अशोक राजपथ स्थित अंजुमन इस्लामिया हाॅल को देखा जा सकता है।
जानिए, वक्फ संशोधन विधेयक में जदयू ने क्या सुझाव दिए थे
1. जमीन राज्य का मामला है, इसलिए नए कानून में भी ये प्राथमिकता बरकरार रहे
2. नया कानून पूर्वप्रभावी नहीं हो
3. अगर वक्फ की कोई सम्पत्ति रजिस्टर्ड नहीं है, लेकिन उस पर कोई धार्मिक भवन मसलन मस्जिद, दरगाह आदि बनी हो तो उससे कोई छेड़छाड़ न की जाये और उसका स्टेटस बरकरार रखा जाये।
4. वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों के निराकरण के लिए जिलाधिकारी से ऊपर के अधिकारी को अधिकृत किया जाये
5. वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति के डिजिटलाइजेशन के लिए छह महीने की समय-सीमा बढ़ाई जाये आदि। इन संशोधनों के बाद शंका की कोई बात रह ही नहीं जाती।
नीतीश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण का बजट 282 गुणा बढ़ा
जदयू प्रवक्ताओं ने कहा कि बिहार में कब्रिस्तान की घेराबंदी, हुनर और औजार योजना, परित्यक्ता नारी के लिए पेंशन, तालीमी मरकज, मदरसों को मान्यता, मदरसा में कार्यरत शिक्षकों की सेवा-शर्तों में सुधार, अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए निःशुल्क कोचिंग जैसी योजनाओं ने मुसलमानों का नीतीश जी पर भरोसा बढ़ाया। उनके शासनकाल में अल्पसंख्यक कल्याण का बजट 282 गुणा बढ़ा। सीएम नीतीश कुमार जी अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के मामले में कितने संजीदा हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण ये है कि कांग्रेस के राज में भागलपुर में 1989 में हुए दंगे के जिन गुनहगारों को लालू-राबड़ी शासनकाल में 15 वर्षों तक बचाया जाता रहा, उनलोगों को बिहार की बागडोर संभालने के बाद नीतीश कुमार ने सजा दिलाने और पीड़ितों को न्याय और पेंशन देने का काम किया।
तेजस्वी यादव बोले- वक्फ बिल पर सीएम नीतीश चुप हैं
लालू प्रसाद के कार्यकाल में 12 साम्प्रदायिक दंगे हुए
जदयू प्रवक्तओं ने कहा कि तथाकथित सेक्यूलर लालू जी ने भागलपुर के दंगाइयों को बचाने का राजनीतिक कुकृत्य किया। साथ ही उनके कार्यकाल में 12 साम्प्रदायिक दंगे हुए। उदाहरणस्वरूप, 1992 में केवल सीतामढ़ी में 48 लोग मारे गए। क्या राजद यह बताएगा कि दंगे में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई? सीएम नीतीश कुमार जी के रहते कोई ऐसी ताकत नहीं जो बिहार में अल्पसंख्यकों के हितों, उनकी सुरक्षा, उनके अधिकार और उनके मान-सम्मान से कोई छेड़छाड़ कर सके। सर्वधर्म समभाव और पूरा बिहार हमारा परिवार की सोच से सीएम नीतीश कुमार डिग जाएं, यह संभव ही नहीं।
जदयू प्रवक्ताओं ने कांग्रेस से पूछा यह सवाल
जदयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेताओं ने कहा कि आजाद हिन्दुस्तान में केवल एक राजनेता नीतीश कुमार जी हैं, जो अल्पसंख्यक भाई-बहनों और उनके परिवार को, जो कांग्रेस काल में और लालू-राबड़ी शासनकाल में हुए दंगों के कारण नवंबर 2005 तक विस्थापित रहे, उनको उनके जमीन और घर पर कब्जा दिलवाया। कांग्रेस बताए कि पूरे देश में उनके शासनकाल में क्या विस्थापित दंगा पीड़ितों को कहीं बसाया गया? मुख्य रूप से राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद खान, गुलाम गौस, खालिद अनवर, अहमद अशफाक करीम, कहकशां परवीन, सलीम परवेज, सुन्नी बोर्ड के अध्यक्ष मो. इरशादुल्लाह, शिया बोर्ड के अध्यक्ष सैय्यद अफजल अब्बास, प्रदेश प्रवक्ता अंजुुम आरा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रभारी मेजर इकबाल हैदर, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी, प्रदेश महासचिव आसमां परवीन, मद्रसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम अंसारी, वरीय नेता इमामउद्दीन राईन, मीडिया पैनलिस्ट अकबर अली आदि उपस्थित रहे।
तेजस्वी यादव ने जदयू की पीसी पर ऐसा कहा
इधर, राष्ट्रीय जनता दल ने जदयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेताओं की प्रेस कांफ्रेंस पर तंज कसा है। कहा कि यह सब डैमेज कंट्रोल के लिए किया जा रहा है। मुस्लिमों का विश्वास सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी से उठ गया है। इधर, जदयू के प्रेस कांफ्रेंस में तीन ऐसे नेता भी दिखे तो दो दिन पहले तक वक्फ संशोधन बिल का विरोध कर रहे थे। जब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की तो वह उठकर चले गए। वहीं तेजस्वी यादव ने इस मामले पर कहा कि आज जो जदयू के मुस्लिम नेताओं को पद बचाने की धमकी और लोभ देकर जो बैठाया गया है उसका पोल खुल गया है क्योंकि सच और सच्चाई का वो लोग सामना नहीं कर पाये और आधा अधूरा ही अपनी बात रख जाये। जो लोग भी बैठे हुए थे ऐसा लग रहा था कि उनको थोप कर बैठाया गया है और सभी लोग मुंह लटकाये बैठे हुए थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जनता दल यू की स्थिति यह है कि नीतीश कुमार का फोटो हटाकर बिहार सरकार के विज्ञापन में नरेन्द्र मोदी का फोटो लगाया जा रहा है। यह लोग जैसे-तैसे चुनाव तक नीतीश जी को साथ रखेंगे लेकिन चुनाव बाद क्या होगा यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।