पत्रकारों से मारपीट करते दिखे सांसद।
- फोटो : सोशल मीडिया।
भागलपुर में जदयू सांसद अजय मंडल सरेआम गुंडागर्दी करते दिखे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भागलपुर आगमन की सूचना पर हवाई अड्डा मैदान के मेन गेट पर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को सांसद ने बेरहमी से पीटा है। इतना ही नहीं सांसद और उनके समर्थकों ने पत्रकारों के साथ गाली-गलौज की और मोबाइल भी छीन लिया। अब इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि सांसद ने किस तरह पत्रकारों को बेरहमी से पीटा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी घटना के दौरान पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे।
जानिये क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान विजिबिलिटी कम होने की वजह से भागलपुर हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट पर था। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सिटी एसपी समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे, जबकि पुलिस गाड़ियों की सख्ती से जांच कर रही थी। इसी दौरान सांसद के बोर्ड लगी एक स्कॉर्पियो पुलिस जांच के दायरे में आई। उस समय गाड़ी में सांसद मौजूद नहीं थे, लेकिन आगे की सीट पर एक युवती और पीछे चार अन्य लोग बैठे थे। प्रोटोकॉल के तहत पुलिस ने जांच के बाद गाड़ी को अंदर जाने दिया। कुछ देर बाद वही गाड़ी हवाई अड्डे से बाहर निकल गई।
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे
इसके बाद सांसद खुद उसी गाड़ी से पहुंचे और वहां समाचार संकलन कर रहे पत्रकार कुणाल शेखर और सुमित कुमार के साथ गाली-गलौज और मारपीट करने लगे। सांसद ने दोनों पत्रकारों को जमीन पर गिराकर जूते-घूसे बरसाए। उनके मोबाइल फोन छीन लिए और अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हो गए। घटना के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे और किसी ने भी हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं दिखाई। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही के चलते मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया।
पीड़ित पत्रकारों ने दर्ज कराई शिकायत
घटना में घायल दोनों पत्रकारों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने तिलकामांझी थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पत्रकारों पर हमले को लेकर मीडिया संगठनों में भारी आक्रोश है। विभिन्न पत्रकार संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की निष्क्रियता और राजनीतिक दबदबे के आगे कानून व्यवस्था की लाचारी को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।